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प्लेटलेट के नाम पर अस्पतालों में चल रहा है ‘खेल’

डेंगू के नाम पर शहर की निजी पैथोलाजिकल लैब व बड़े अस्पतालों में प्लेटलेट के नाम पर बड़ा खेल हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन व लैब संचालक की साठगांठ से  डेंगू और मलेरिया के भर्ती मरीजों के प्लेटलेट की संख्या कम बताई जा रहीं है। जबकि दूसरे लैब में प्लेटलेट की संख्या सामान्य बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्लाइड के माध्यम से प्लेटलेट्स की संख्या में एक हजार, या फिर पांच सौ का अंतर हो सकता है। लेकिन बहुत ज्यादा नहीं हो सकता है। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। जिनमें एक लाख संख्या तक का अंतर आ रहा है। प्लेटलेटस की संख्या के इस खेल में मरीज व उनके परिजनों की हालत पतली हो रही है।


दरअसल, डेंगू और मलेरिया को लेकर शहर के लोगों में दहशत है। शहर के लगभग सभी निजी और सरकारी अस्पताल बुखार के मरीजों से फूल हैं। इसमें भर्ती सभी मरीजों के डेंगू के नाम पर प्लेटलेट की जांच कराई जा रही है। आरोप है कि इस दौरान अस्पताल प्रबंधन और लैब संचालक साठगांठ कर मरीजों के प्लेटलेट की संख्या कम बताई जा रही है। ताकि मरीजों में दहशत पैदा कर ज्यादा दिन तक उनको भर्ती रखा जा सके। ऐसा करके अस्पताला मोटा मुनाफा कमाने में जुटे हैं। जबकि दूसरे लैब में मात्र कुछ देर के अंतराल पर ब्लड में मौजूद प्लेटलेट काउंट कराने में दो गुणा से भी अधिक के अंतर पाया जा रहा है। उधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज को भ्रम है। स्लाइड बनाने और मशीन में कुछ टेक्नीकल खामियां होने के कारण संख्या में थोड़ी बहुत का अंतर आ सकता है। लेकिन बहुत ज्यादा का अंतर नहीं होता।
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जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. ओपी मेहता: निजी अस्पताल संचालक डेंगू के नामपर मरीजों को बेवकूफ बना रहे हैं। सामान्य बुखार में भी प्लेटलेट की संख्या कम हो जाती है। कई बार ऐसा है कि शरीर में गंभीर बीमारी होने के कारण भी प्लेटलेट की संख्या कम हो जाती है। उनका कहना है कि अगर मरीज को कोई बीमारी नहीं है तो वह 20 हजार तक प्लेटलेट में स्वस्थ्य रह सकता है।

ईएसआई के वरिष्ठ चिकित्सक और लैब इंचार्ज डॉ. जशवंत सिंह: इनका भी मानना है कि प्लेटलेट के नामपर निची लैब और अस्पताल संचालक बड़ा खेल कर रहे हैं। एक समय में कई जगहों पर प्लेटलेट काउंट कराने में थोड़े बहुत का अंतर आ सकता है। लेकिन लाख और हजारों का नहीं।

प्लेटलेट की जांच की वृद्धि
- स्लाइड के माध्यम से
- इमेट्रोलाजी एलाइजा काउंटर से

स्लाइड से जांच की वृद्धि
- स्लाइड के माध्यम से काउंट करने में एक घंटे का समय
- ब्लड के नमूने लेने के बाद स्लाइड बनाए जाते
- केमिकल लगाकर तैयार किए जाते हैं
- इसके बाद जांच
 
इमेट्रोलाजी एलाइजा काउंटर
- पांच मिनट में जांच रिपोर्ट
- इसमें गड़बड़ी होने की संभावना अधिक होती है

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