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बदला चुकाकर इतिहास रचने उतरेगा भारत

बदला चुकाकर इतिहास रचने उतरेगा भारत

19वें राष्ट्रमंडल खेलों के आखिरी दिन गुरुवार को भारत जब यहां मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में हाकी स्वर्ण पदक मुकाबले में उतरेगा तो उसका मकसद न सिर्फ पदक पर कब्जा कर इतिहास रचने का होगा बल्कि वह विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया से अपनी ही धरती पर मिली कड़वी हारों का बदला भी चुकाना चाहेगा।

राष्ट्रमंडल खेलों में हाकी के 12 वर्ष के इतिहास में भारत अब तक एक अदद पदक के लिए तरसता रहा है। पहली बार टीम फाइनल में पहुंची है और उसे घरेलू दर्शकों का अपार समर्थन मिल रहा है। यही मौका है कि स्वर्ण पदक पर अपना नाम लिखकर वह इतिहास रच दे।

गत तीन बार के चैंपियन आस्ट्रेलिया ने लीग मैच में भारत को 5-2 से बुरी तरह रौंद दिया था। इससे पहले इसी साल इसी मैदान पर विश्व कप में उसने मेजबान टीम को इसी अंतर से हराकर गहरा जख्म दिया था। अब भारत के पास बेहतरीन मौका है कि इन तमाम जख्मों का हिसाब एक साथ बराबर करें।

हालांकि भारत की राह आसान कतई नहीं है। आस्ट्रेलिया के मजबूत डिफेंस और आक्रामक स्ट्राइक पंक्ति के सामने अगर कोई चीज भारत को मजबूती दे सकती है तो वह है मनोबल। कप्तान राजपाल सिंह और उनके धुरंधरों को पूरे आत्मविश्वास के साथ वैसा ही खेल दिखाना होगा जैसा उन्होंने पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ दिखाया था।

आस्ट्रेलिया इन खेलों में अब तक अजेय रहा है तो भारत सिर्फ आस्ट्रेलिया से ही हारा है। भारत ने अंतिम लीग मुकाबले में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 7-4 से हराकर सेमीफाइनल की राह पकड़ी थी और फिर अंतिम चार में अपने से कहीं ऊंची रैंकिंग वाले इंग्लैंड को पेनाल्टी शूटआउट में शूट करके फाइनल में जगह बनाई।

खेलों की शुरुआत से पहले ही राजपाल दोहराते रहे हैं कि टीम विश्व कप जैसी गलती नहीं करेगी लेकिन लीग मैच में बिल्कुल गलतियों की पुनरावृत्ति दिखी। इतना ही नहीं जिन मैचों में जीत हासिल हुई उनमें भी कुल मिलाकर प्रदर्शन लचर ही रहा, इसलिए भारतीय खिलाड़ियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी।

मैच जीतने के लिए भारत को अपने खिलाड़ियों के बीच तालमेल और डिफेंस के क्षेत्र में सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी। मलेशिया के खिलाफ वह 3-2 से जीता जरूर था लेकिन तब तालमेल की जबर्दस्त कमी देखी गई थी। पूरे मैच में अकेले राजपाल दोनों छोर से गेंद के साथ भागते और मूव बनाते रहे लेकिन इन मूव को गोल में बदलने में कामयाबी कम ही हासिल हुई थी।

कोच होजे ब्रासा ने भी तब कहा था कि टीम के डिफेंस में बहुत सुधार की जरूरत है वर्ना टीम को पदक का सपना भुला देना पड़ेगा। अब जब मेजबान टीम इन खेलों में पहली बार पदक पक्का कर चुकी है तो इस पदक का रंग सुनहरा करने के लिए टीम को इन गलतियों से बाज आना होगा।

इसके अलावा पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदलने की कला के साथ टीम को मैदान पर हो रही बेजा गलतियों से भी बचना होगा। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में बढ़त बनाने के बावजूद भारत ने उसे 10 मिनट के अंदर तीन पेनाल्टी कार्नर दिए थे जिनमें से दो गोल में बदल गए थे।

सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने सभी गोल पेनाल्टी कार्नर पर किए थे और भारत को केवल एक बार यह मौका दिया था। पाकिस्तान और मलेशिया के खिलाफ लीग मैचों जब भारत मैच पर हावी हो चुका था तब उसने पेनाल्टी कार्नर देकर विपक्षी टीमों को वापसी के मौके दिए। ऐसे नाजुक मौकों में संभलने की कला टीम को दिखानी होगी।

टीम अपने घरेलू दर्शकों के सामने इतिहास रचने की दहलीज पर है। प्रतियोगिता शुरू होने के पहले उसे पदकों की होड़ में नहीं गिना जा रहा था लेकिन इस नहीं गिने जाने के कारण वह जितना दवाबमुक्त होकर खेली लेकिन अब कई गुणा ज्यादा उम्मीदों का दवाब उस पर है। अगर वह मानसिक रूप से इस दवाब को झेल पाए तो आधा मैदान वहीं जीत लेगी।

दूसरी ओर, लगातार बेहतरीन फार्म में चल रही आस्ट्रेलियाई टीम के हौसले बुलंद हैं। टीम ने भारतीय सरजमीं पर विश्व कप जीतने के बाद से अब तक अपना प्रचंड फार्म बरकरार रखा है और किसी को अपने सामने टिकने नहीं दिया है। उसका मनोबल निश्चित रूप से सातवें आसमान पर है। इसलिए आस्ट्रेलिया के बुलंद हौसलों और करोड़ों देशवासियों की दिली उम्मीदों के बीच कड़े संघर्ष की उम्मीद तो की ही जा सकती है।

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