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सचिन को सलाम!

सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट क्रिकेट में 14,000 रनों के एवरेस्ट को छू लिया है। उनकी इस उपलब्धि पर पूरा देश झूम रहा है। क्रिकेट के इस भगवान को सलाम। सचिन तेंदुलकर का नाम किसी एक उपमा में समा नहीं पा रहा है, इसलिए उन्हें सबसे बढ़कर भगवान का ही टाइटल दे दिया गया। मास्टर-ब्लास्टर, क्रिकेट के कोहिनूर या अन्य किसी भी उपमा में अब उनके खेल जितनी ताजगी नहीं दिखती। सचिन अब जब भी मैदान पर उतर रहे हैं, तो क्रिकेट का एक नया इतिहास बन रहा है। उनकी इंद्रधनुषी बल्लेबाजी को देखकर सर डॉन ब्रेडमैन तक निहाल हो गए थे। आज पूरा विश्व क्रिकेट अभिभूत है। यकीनी तौर पर कहा जा सकता है कि इस करिश्माई बल्लेबाज की बराबरी इस युग में तो कोई नहीं कर सकता।
दिनेश वशिष्ठ, दिल्ली विश्व., दक्षिण परिसर

किसके लिए प्रजातंत्र
पिछले दिनों संपादकीय पेज पर आश नारायण राय का ‘उल्टे गियर में जाता लोकतंत्र’ शीर्षक से छपा लेख पढ़ा। इस लेख में राय साहब ने भारत को छुआ तक नहीं। इसमें रूस-मध्य एशियाई देशों, क्यूबा, यमन, ईरान व कुछ अफ्रीकी देशों के लोकतंत्र को जरूर दर्शाया गया। सवाल उठता है, भारत को क्यों नहीं छुआ? कारण स्पष्टतया चीन है। वैसे मेरी राय में प्रजातंत्र 40 प्रतिशत मूर्खतंत्र है, तभी तो हमारे यहां हर रोज हड़ताल, गली-गली में भ्रष्टाचार और आंदोलन देखने को मिलता है। क्या यही प्रजातंत्र का लक्ष्य होना चाहिए?
चौ. श्रीचंद्र भाटी, कीर्तन वाली गली, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

शांति का प्रतीक है फैसला
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुकदमे में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जो फैसला दिया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। इस फैसले से हमें सीख लेनी चाहिए कि अमन-चैन, शांति एवं एकता से ही देश समृद्ध एवं शक्तिशाली बन सकता है। अत: मुझे दृढ़ विश्वास है कि भविष्य में भी हिंदू-मुस्लिम एकता इसी तरह बनी रहेगी।
रोशन लाल बाली, 655/5, महरौली, नई दिल्ली

नाकामी छिपाने की कोशिश
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के विधानसभा में दिए गए बचकाने बयान ने कश्मीर समस्या का अंतरराष्ट्रीयकरण कर डाला है। उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि कश्मीर का भारतीय संघ में कभी विलय नहीं हुआ था, बल्कि इसे सशर्त जोड़ा गया था। यह बयान भारतीय संविधान के सर्वथा खिलाफ है। इस बयान ने जम्मू-कश्मीर के आम अवाम के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा काम किया है। उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में यह बयान अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए दिया है। अपनी हुकूमत के खिलाफ आम कश्मीरी के गुस्से को कम करने के लिए उमर ने खतरनाक खेल खेला है। उनके इस बयान से हिंदुओं, मुसलमानों, सिखों व ईसाइयों, सभी में नाराजगी है।
आसिफ अली, सी-12, गुरु रामदास नगर, लक्ष्मी नगर, दिल्ली

हमें कैसा देश चाहिए
आजादी के बाद महात्मा गांधी का सपना था कि इस देश का हर गांव व शहर समृद्ध हो। देश पर मर-मिटने वाले हर क्रांतिकारी के कुछ ऐसे ही सपने थे, लेकिन आजादी के 63 साल बाद भी ऐसा नहीं हुआ है। देश का पैसा स्विस बैंकों में भर दिया गया है और इस काले धन को वापस लाने के लिए सरकार जरा भी उत्सुक नहीं है। इसी तरह, बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने पर भी सरकार ने कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। युवा बेरोजगार होने लगे, देश की जनता को जहरीले अनाज खाने के लिए मजबूर किया गया। किसानों के भोलेपन का फायदा उठाकर व उन्हें लालच देकर उनके हाथों में जहरीले बीज दिए गए। अब उन बीजों से हमारी धरती बंजर हो रही है। आखिर हम कैसा भारत बना रहे हैं?
अशोक कुमार यादव, उत्तम नगर

प्रशासन सुस्त अपराधी मस्त
हमारे देश में प्रशासन की नाक के तले ही अपराधी पैदा हो रहे हैं। पुलिस चाहे, तो वह अपराध को जड़ से समाप्त कर सकती है,  लेकिन नहीं, भ्रष्टाचार ने हमारे समूचे प्रशासनिक ढांचे को जजर्र बना दिया है। जितनी भी लूटपाट, चोरी-चकारी या वेश्यावृत्ति की घटनाएं हों, उन सबकी जानकारी किसी न किसी पुलिसकर्मी को अवश्य होती है, लेकिन पुलिस व कानून का मजााक उड़ाकर अपराधी सरेआम घृणित वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। उन्हें पता है कि कानून या पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इसलिए देश की शीर्ष अदालत एवं गृह मंत्रालय और कानून के ज्ञाताओं-रक्षकों से अनुरोध है कि वे कानून-व्यवस्था को इतना दुरुस्त बनाएं कि कोई भी शख्स, चाहे वह महिला हो या पुरुष, अपराध करने की हिम्मत न जुटा सके।
हरीओम प्रकाश वर्मा, संतुष्टि अपार्टमेंट, खजूरी खास, दिल्ली

भ्रूण हत्या एक अभिशाप
हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या की कुरीति न केवल पारिवारिक व सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति में असंतुलन पैदा कर रही है, अपितु नैतिक मूल्यों का ह्रास करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। हमें इसके खिलाफ मोर्चा लेना चाहिए। 
प्रो. अनूप गक्खड़, हरिद्वार

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