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सावधान! डेंगू का प्रकोप अभी थमा नहीं

विश्व के 100 से भी ज्यादा देशों में फैल चुके डेंगू बुखार का प्रकोप अभी भी उत्तर भारत में लोगों को सता रहा है। एडिस मच्छरों के काटने से फैले इस रोग की गिरफ्त में पहले-पहले वेस्टइंडीज में काम करने वाले दास जब आए तो उनकी कमर आगे की ओर झुक गई और उनका बॉडी पॉस्चर बदलकर ‘डैंडी’ यानी जानवरों वाले पॉस्चर की तरह हो गया। तभी से इसका नाम ‘डैंडी फीवर’ रख दिया गया। बाद में यह डेंगू के नाम से जाना गया।

लक्षण
डेंगू के मरीजों में बुखार, सिर दर्द, घुटन, कै आने, पेट खराब होने, भूख न लगने, चक्कर आने, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, ग्रंथियों में सूजन और बॉडी में रैसेज जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसमें कभी-कभार इसके मरीजों में आंखों के पीछे दर्द, बॉडी में लाल दाने, नाक और स्टूल से ब्लीडिंग भी होने लगती है। स्वस्थ शरीर में औसतन डेढ़ से चार लाख तक प्लेटलेट्स होते हैं, लेकिन डेंगू मरीजों में इनकी संख्या बहुत कम हो जाती है।
प्लेटलेट्स की संख्या घटते-घटते जब 30,000 तक पहुंच जाए तो समझ लें कि समस्या गंभीर है। डॉ़ प्रसाद कहते हैं कि डेंगू मरीजों की मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इतना ज्यादा होता है कि उन्हें लगता है मानों पूरी बॉडी को दर्द ने तोड़कर रख दिया हो। यही वजह है कि इस बीमारी को ‘ब्रेकबोन’ भी कहा जाता है।

इलाज
इसके लिए वैक्सीन निकालने की काफी कोशिशें हो रही है, लेकिन अब तक वैज्ञानिकों को इसमें पूरी तरह से सफलता नहीं मिल पाई है। यही वजह है कि इसके मरीजों को आराम पहुंचाने के लिए उनकी समस्याओं को एक-एक करके सुलझाने की कोशिश की जाती है।
- बुखार उतारने के लिए पैरासीटामोल की गोलियां दी जाती हैं।
-कभी-कभार जरूरी हो जाने पर बुखार उतारने या कम करने के लिए मरीज को ठंडी पट्टियां या इंजेक्शंस भी देने पड़ते हैं।
ज्वाइंट्स में सूजन या मांसपेशियों में इसका असर हो गया हो तो इलाज के माध्यम से उसे दूर या कम किया जाता है।

रोकथाम के उपाय
- एडिस मच्छर को पनपने से रोकने के सभी जरूरी उपाय करें।
- घरों या अपने आसपास के इलाकों में पानी का जमाव न होने दें।
- कूलर, गमले, टायर, बकेट्स, जानवरों के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तनों वगैरह का पानी दो-तीन दिनों के अंतराल में बदलते रहें।
- पूरी बाजू के शर्ट और फुल पैंट पहनें ताकि शरीर के कम से कम हिस्से खुले रहें।
- बॉडी के खुले पार्ट्स में मॉस्कीटो रेपलेंट क्रीम यूज करें।
- घर और आसपास के इलाके में मच्छर भगाने वाले स्प्रे, फॉगिंग, इन्सेक्टिसाइस दवाओं वगैरह का छिड़काव कराएं।
- ध्यान दें कि बच्चों को जहां खेलने भेज रहे हैं, वहां या उसके आसपास के इलाकों में पानी का जमाव तो नहीं है!
- बच्चों को स्विमिंग के लिए भेजने से पहले यह जांच करना न भूलें कि पूल का पानी कितने दिनों में बदला जा रहा है!
- ऐसे लोगों से बचें जो पहले से ही इसके शिकार हों। खासकर बच्चों को ऐसे मरीजों से दूर रखें।        

खतरा अभी टला नहीं
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर (डॉ़) कामेश्वर प्रसाद के अनुसार मच्छर काटने के तीन से 15 दिनों के बीच डेंगू के लक्षण नजर आने लगते हैं, इसलिए हो जाएं सावधान, यदि आपको़...
-अचानक ठंड लगनी शुरू हो जाए।
- एकदम से बहुत तेज बुखार चढ़ने लगे ।
- सिर दर्द, पैर दर्द, जोड़ों में दर्द और लो बैक पेन शुरू हो जाए।
- गोल-गोल घुमाते हुए आंखों में दर्द महसूस हो।
- हार्ट रेट और ब्लड प्रेसर लो होने लगे।
- गले की ग्रंथियों में सूजन आने लगें।
- आंखें लाल होने होने लग जाएं।
- चेहरे पर पिंक रैसेज दिखें, जो बाद में गायब भी होने लगें।

डाइटीशियन की राय
इन दिनों अस्पताल पहुंचने वाले डेंगू के मरीजों में बुखार, सिर दर्द व डेंगू के अन्य लक्षणों के साथ-साथ शरीर पर सुई की नोंक के बराबर महीन दाने और आंख के पीटे दर्द की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। बुखार कम करने के लिए डेंगू के मरीजों को पैरासीटामोल दे सकते हैं। डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स कम काम कर पाते हैं, ऐसे में उन्हें ब्रुफेन की गोली देना खतरनाक हो सकता है।
डॉ़ जितेंद्र साहू, पेडिएट्रिक्स विभाग, एम्स

घरेलू इलाजः पपीता खाया क्या!
आपको डेंगू हो या मोटापे की चिंता। पपीता दोनों को दूर भगाने में सहायक है। इसका कच्चा फल हरा और पकने पर पीले रंग का हो जाता है। इसका सेवन से पित्त का शमन करता है तथा भोजन की भूख बढ़ाता है।

- यह पाचन शक्ति सुधारता है तथा पेट के विकारों को दूर करता है। कच्चा पपीता खाने से कफ-वात की वृद्घि होती है, लेकिन यह अजीर्ण, यकृत विकार, बवासीर आदि रोगों के लिए गुणकारी होता है।

- पपीता आहार पचाने में मदद करता है। इसमें दस्त और पेशाब साफ लाने का गुण है। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत हमेशा बनी रहती है, उन्हें पपीते का नियमित सेवन करना चाहिए।

- पपीता नेत्र रोगों में हितकारी होता है, क्योंकि इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्र में पाया जाता है, इसके सेवन से रतौंधी (रात को न दिखाई देना) रोग का निवारण होता है और आँखों में ज्योति बढ़ती है। पपीता से रक्तशुद्घि, पीलिया रोग का निवारण, अनियमित मासिक धर्म में हितकारी, धातु संबंधी विकार एवं वीर्य की कमी दूर करने में भी यह मददगार है। सौंदर्य वृद्घि में सहायक होता है।

- कच्चे पपीते को काटकर चेहरे पर रगड़ने से चेहरे के कील, कालिमा, मैल व अन्य दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। इससे त्वचा में निखार आता है। चेहरे पर मुँहासे हों तो कच्चे पपीते का गूदा मलें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे और त्वचा में निखार आ जाएगा।

- आप खाज-खुजली आदि से परेशान हों तो कच्चे पपीते का दूध निकालकर उन पर लगाएँ। इससे खाज-खुजली से छुटकारा मिलेगा और त्वचा कोमल व चमकीली हो जाएगी।

- पपीते में पाए जाने वाले विविध एंजाइमों के कारण कैंसर से बचाव होता है, विशेषकर आंतों के कैंसर से।

- कच्चे पपीते की सब्जी पेट के लिये बहुत मुफीद होती है। डेंगू बुखार  के दौरान इसका सेवन बहुत उपयोगी रहता है। वहीं पका पपीता पथरी, मि, अपच, कब्ज से मुक्ति दिलाता है। इसे खाने से मुंह के विकार दूर हो जाते हैं। मां के दूध में वृद्घिकारक होता है। यह अच्छी तरह पका होना चाहिये।

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