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समान पद पर मिले एक वेतनमानः हाई कोर्ट

समान पद पर मिले एक वेतनमानः हाई कोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि समान प्रकृति वाले कार्य कर रहे और एक ही पद पर आसीन कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं हो सकता बशर्ते किसी की शैक्षणिक योग्यता अधिक हो।

इसके साथ ही अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के एक फैसले के खिलाफ केंद्र की अपील को खारिज कर दी। प्रसार भारती कर्मचारियों के एक समूह की याचिकाओं को मंजूर करते हुए फैसले में कहा गया था कि समान पद पर काम कर रहे कर्मचारियों के बीच वेतनमान को लेकर भेदभाव नहीं हो सकता।

न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति मूलचंद गर्ग की पीठ ने लेकिन स्पष्ट किया कि अगर किसी कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता अधिक है तो वेतन में अंतर हो सकता है।

भारतीय प्रसारण निगम अधिनियम के तहत 1997 में प्रसार भारती का गठन किया गया था। कर्मचारियों ने वेतनमान में अंतर होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह सूचना प्रसारण मंत्रलय में अस्थायी कर्मचारी थे और प्रसार भारती में उन्हें नियमति किए जाने के बाद 5000-8000 रुपए के वेतनमान की पेशकश की गई थी।

वहीं, उसी मंत्रालय में नियमित कर्मचारी रहे लोगों को निगम में 6500-10500 रुपए के वेतनमान की पेशकश की गई थी। कैट ने 2007 में केंद्र की दलीलों को खारिज करते हुए उसे प्रसार भारती के कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का निर्देश दिया था जो समान पद पर एक जैसे कार्य कर रहे थे। कैट के आदेश के खिलाफ केंद्र ने उच्च न्यायालय में अपील की थी।

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