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सुखाड़ की मार से झारखंड त्रस्त

राज्य की जनता सुखाड़ की मार से त्रस्त है और संबद्ध विभागों के आला अफसर मंत्रियों के आने का इंतजार है। इंतजार इसलिए कि मंत्री प्रभार लें तब उनके हाथों ही सुखाड़ से निबटने की योजनाओं को गति दी जा सके। राशि की निकासी हो। टेंडर फाइनल हो। राज्य में लगातार तीसरे साल सुखाड़ की स्थिति बनी है। अनावृष्टि और अल्पवृष्टि के कारण यही स्थिति  बनती आ रही है।

राज्य के मुख्य सचिव यह स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले साल तक सुखाड़ से निबटने के लिए तात्कालीक योजनाएं बनती थीं। इससे योजनाओं को असर देखने को नहीं मिलता था। इस वर्ष दूरगामी योजनाएं ली जा रही हैं। डीप बोरिंग और हाई येल्डिंग टयूब वेल सुखाड़ के बाद भी काम आयेंगे। कोई भूख से नहीं मरे इसलिए हर पंचातय में 10 कुंतल अनाज रखवा दिया गया है। हालत यह है कि सुखाड़ से निबटने के लिए जो भी घोषणाएं की गई थीं, वे अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। सभी योजनाएं प्रक्रियाधीन ही हैं।

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