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रोने के फायदे

रोने का रोना लेकर बैठ जाओ तो फायदे ही फायदे हैं। रोना जीवन में बहुत काम आता है। जिसे रोना नहीं आता, समझो वह पिछड़ गया। बात-बात पर आंखों से आंसू बहने लगें तो समझो जीवन नैया पार। यह कतई आवश्यक नहीं कि आप वास्तव में रोयें ही, बस रोने की कला आनी चाहिए। वैज्ञानिक रूप से रोना भले लाभदायक न हो, परन्तु कलात्मक रूप से रोना फायदे का मूल है।

रोने के भी कई प्रकार हैं। केवल आंसू भर लाना, आंसू टपकाना, दहाड़ मारना और फूट-फूटकर रोना। जिसे फूट-फूटकर रोना आ गया, वह सफल हो गया। फिर बस अवसर मिलते ही रो डालिए, हर मुश्किल आसान हो जाएगी। कभी रोने की मेहनत बेकार नहीं जाती और इसका लाभ देर-सबेर मिलता ही है।

जिस कुशलता से मैं रोता हूं, देखने वाले दांतों तले अंगुली दबाकर चकित हो जाते हैं। बचपन के रोने को जाने दीजिये। वहां रो तो मां दूध पिला देती है और पिता टॉफी-बिस्कुट दिला देते हैं। रोने की शुरुआत विद्यार्थी काल से शुरू कर दी जाए तो युवावस्था तक आदमी इस कला में परिपक्व हो जाता है।

दूसरों की दया और करुणा पाने के लिए रोना जरूरी है। मैं खुद स्कूल-कॉलेज में रोया और इसका भरपूर फायदा लिया। घरवालों ने राशन की ‘क्यू’ में भेजा तो वहां रोया। दया पाकर लाइन तोड़कर आगे जा लगा और उल्लू सीधा करके हंसता हुआ घर आ गया।

आजकल अकेली रोनी सूरत हेल्पफुल नहीं है। बाकायदा रोना पड़ता है। नौकरी लगी तो दफ्तर में अफसर के सामने रोया। उसने सारा काम मेरे बगल वाले को दे दिया और उधर चमचागिरी का गुण पृथक होने से पचास लफड़ों से बचा रहा। रोने के साथ चमचागिरी का गुण सोने में सुहागा के समान है। प्रमोशन भी मुझे ही मिला और बगलवाला रगड़ता रहा कलम।  

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