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मल्टीप्रोग्रामिंग

मल्टीप्रोग्रामिंग एक प्रोसेसर पर एक साथ कई प्रोग्राम को चलाने में मदद करता है। किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में मल्टीप्रोग्रामिंग की भूमिका एक प्रोग्राम का काम खत्म होने के बाद उसे क्रमानुसार रखकर, दूसरे प्रोग्राम से जुड़े कार्य को शुरू करने की होती है। मल्टीप्रोग्रामिंग, मल्टीप्रोसेसिंग से पूरी तरह से अलग है। 

मल्टीप्रोसेसिंग में एक साथ भले ही कई प्रोग्राम एक साथ एक्टिव होते हैं, लेकिन यूनीप्रोसेसर एक साथ सभी प्रोग्राम को आदेश नहीं देता है। मल्टीप्रोसेसिंग में यूनिप्रोसेसर एक बार एक प्रोग्राम को कमांड देता है और जब वह प्रोग्राम अपना काम पूरा कर लेता है, उसके बाद लाइन में लगे दूसरे प्रोग्राम को कमांड देता है।  यानी इस प्रक्रिया में कंप्यूटर को कोई भी टास्क करने में किसी भी तरह से कम वक्त नहीं लगता है।

कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के नजरिये से देखा जाए तो मल्टीप्रोग्रामिंग एक बहुउपयोगी तकनीक है। व्यक्ति एक साथ कई प्रोग्राम पर काम कर सकता है। इस अद्भुत तकनीक का कारण यह है कि मल्टीप्रोग्रामिंग यूनिप्रोसेसर का इस तरह से इस्तेमाल करता है कि वह दिए गए कमांड को कम वक्त में ही कार्यरूप प्रदान कर देता है। इससे कंप्यूटर यूजर एक साथ कई सारे प्रोग्राम पर लगभग समान गति से काम कर पाता है और वक्त की बर्बादी भी कम होती है।

मल्टीप्रोग्रामिंग के भीतर की इस तकनीक को इंटरप्ट के नाम से जाना जाता है। इंटरप्ट के माध्यम से प्रत्येक टास्क की प्रोसेसिंग को पूरा करने के लिए खास वक्त दिया जाता है और उस समय सीमा के समाप्त होने के बाद ही ऑपरेटिंग सिस्टम अगला टास्क पूरा करता है।

मल्टीप्रोग्रामिंग सही तरीके से काम करे इसके लिए जरूरी है कि कंप्यूटर की मेमोरी काफी अच्छी हो। कंप्यूटर की क्षमता ज्यादा होनी चाहिए कि अगर किसी कारण से एक प्रोग्राम को पूरा करने में परेशानी आए तो उसका असर दूसरे प्रोग्राम पर न पड़े। कंप्यूटर की मेमोरी प्रोटेक्शन की व्यवस्था करना भी जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर एक प्रोग्राम की खामी का असर पूरे कंप्यूटर सिस्टम पर पड़ सकता है।

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