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शतकों के शहंशाह ने दिया आस्ट्रेलिया को तगड़ा जवाब

शतकों के शहंशाह ने दिया आस्ट्रेलिया को तगड़ा जवाब

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे और अंतिम टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर ने सोमवार को अपनी नाबाद 191 रन की पारी की बदौलत बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया जिससे भारत ने मेहमान टीम के स्कोर का पीछा करते हुए अपनी पारी को संभाल लिया।

एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में हो रहे टेस्ट मैच में तेंदुलकर ने अपना 49वां टेस्ट शतक जमाया और इसमें सलामी बल्लेबाज मुरली विजय (139 रन) ने भी उनका पूरा साथ दिया। दोनों बल्लेबाजों के शतक की बदौलत भारत ने तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक ऑस्ट्रेलिया की 478 रन की पारी के जवाब में अपनी पहली पारी में पांच विकेट खोकर 435 रन का स्कोर खड़ा कर लिया है।

बीते तीन महीने से जबर्दस्त फॉर्म में चल रहे 37 वर्षीय मास्टर ब्लास्टर ने न सिर्फ भारतीय पारी को सुरक्षित स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, वहीं ये संभावनाएं भी मजबूत कर दीं कि भारत इस मैच को जीतकर सीरीज को 2-0 से फतह कर सकता है।

अपना पहला टेस्ट शतक बनाने वाले विजय और तेंदुलकर ने तीसरे विकेट के लिए रिकॉर्ड 308 रन की साझेदारी की और दोनों की पारी ने ऑस्ट्रेलियाई स्कोर के खिलाफ भारत के मुंहतोड़ जवाब की नींव रख दी।

क्रिकेट जगत का मील का पत्थर कहे जाने वाले तेंदुलकर कल 14000 टेस्ट रन पूरे करने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने आज एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया जब उन्होंने 20वीं बार 150 रन से अधिक की पारी खेली। इस तरह उन्होंने 19 बार 150 से अधिक रन बनाने के ब्रायन लारा के रिकॉर्ड को तोड़ा।

इस टेस्ट में अब दो दिन बचे हैं और भारत अब पहली पारी में ठोस बढ़त हासिल करते हुए ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाना चाहेगा। उम्मीद है कि मैदान की पिच धीमी गति के गेंदबाजों की मदद करेगी। तेंदुलकर और विजय ने चेन्नई में 1979 में बनाया गया एलन बॉर्डर और किम हजेस का 222 रन की साझेदारी का रिकॉर्ड तोड़ा। तीसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज पहले दो सत्र में कोई भी विकेट नहीं झटक पाए।

अपने छठें दोहरे शतक की ओर बढ़ रहे सचिन ने 191 रन की अपनी पारी में 319 गेंदों का सामना करते हुए अब तक 20 चौके और दो छक्के लगाए हैं। सचिन ने सुबह के सत्र में फिरकी गेंदबाज नैथन हॉरित्ज के ओवर में लगातार दो छक्के जड़ते हुए अपना 49वां टेस्ट शतक पूरा किया। वहीं, विजय ने दूसरे सत्र में तेज गेंदबाज पीटर जॉर्ज की गेंद पर एक रन लेते हुए अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया।

चोटिल गौतम गंभीर के स्थान पर टीम में लिए गए मुरली ने मौके का पूरा फायदा उठाया और भारत की जवाबी पारी में अपना योगदान दिया। उन्होंने 310 गेंदों का सामना करते हुए 14 चौकों और दो छक्कों की मदद से 139 रन बनाए। दिन के आखिरी सत्र में भारत ने तीन विकेट खो दिए और इसमें से दो विकेट मिशेल जॉनसन ने लिए। जॉनसन अब तक 89 रन देकर तीन विकेट झटक चुके हैं।

जॉनसन ने विजय को विकेटकीपर के हाथों कैच कराया और फिर अपना पदार्पण टेस्ट खेल रहे चेतेश्वर पुजारा को महज तीन गेंदों के बाद पगबाधा कर दिया। तीसरे दिन भारत का आखिरी विकेट सुरेश रैना के रूप में गिरा लेकिन उससे पहले वह तेजी से 32 रन बना चुके थे। रैना ने बेन हिलफेनहॉस और जॉनसन के ओवरों में पांच चौके लगाए। बहरहाल, वह अच्छी शुरुआत के बाद अपना स्कोर आगे नहीं बढ़ा पाए और माइकल क्लार्क ने उन्हें आउट कर दिया।

इससे पहले, तेंदुलकर ने 44 रन के अपने स्कोर से आगे शुरुआत करते हुए ऑस्ट्रेलियाई हमले को दिन के पहले दो घंटे में ही ध्वस्त कर दिया। उन्होंने नैथन हारित्ज के 59वें ओवर में एक लंबा छक्का जड़ते हुए शतक पूरा किया। इससे पहले जब वह 93 रन पर खेल रहे थे तब भी उन्होंने एक छक्का लगाते हुए अपना स्कोर 99 रन पर पहुंचाया था।

विजय ने भी 42 रन के अपने कल के स्कोर से आगे खेलते हुए अपना तीसरा टेस्ट अर्धशतक 41वें ओवर में पूरा किया। बीच-बीच में जब विजय अपना चित्त खोते दिखे तो सचिन उन्हें समझाने गए और उन्हें आराम से खेलने की सलाह दी।

पोंटिंग ने तेजी से गेंदबाजी आक्रमण को बदला लेकिन इससे उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। विजय एक-एक रन लेते रहे और तेंदुलकर को स्ट्राइक देते रहे। पहले सत्र में एक भी विकेट नहीं देने के बाद दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे सत्र में अच्छी बल्लेबाजी करते हुए बड़ी साझेदारी की। जब तेंदुलकर सुबह ही अपना शतक पूरा कर चुके थे तो सभी की निगाहें विजय पर थी। तमिलनाड़ु के इस बल्लेबाज ने 99 रन के स्कोर के बाद महज एक रन लेकर शतक पूरा करने के लिए 11 गेंदों का सामना किया।

उन्होंने पीटर जॉर्ज की गेंद को कवर पर भेजते हुए एक रन लिया और शतक पूरा किया। वह तब आउट होते होते बचे जब उन्होंने नैथन हॉरित्ज की गेंद को हवा में उछाला लेकिन गेंद शॉर्ट मिड विकेट पर रिकी पोंटिंग से कुछ पहले ही जा गिर गई। इससे पहले विजय का श्रेष्ठ स्कोर दिसंबर 2009 में श्रीलंका के खिलाफ था जब उन्होंने 87 रन बनाए थे। बाद में 139 रन के अपने स्कोर पर विजय जॉनसन की गेंद पर टीम पेन का कैच थमा बैठे।

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