अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कोल सेक्टर में हड़ताल टली

आइपीओ के खिलाफ 18 अक्तूबर से कोल सेक्टर में पूर्व घोषित सप्ताहव्यापी हड़ताल अब टल गई है। रविवार को धनबाद में ट्रेड यूनियनों के संयुक्त सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर फिलहाल हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। कहा गया कि दुर्गा पूजा, छठ आदि के कारण हड़ताल उचित नहीं है। हड़ताल की जगह सात दिनों तक विरोध प्रदर्शन कर विनिवेश की मुखालफत की जाएगी।

18 नवंबर को नागपुर में यूनियनों  नेताओं की फिर बैठक होगी तथा आगे के आंदोलन पर विचार किया जाएगा। सम्मेलन में कई यूनियनों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। आइपीओ, आडटसोर्सिग एवं ठेका सिस्टम की जमकर आलोचना की गई। साथ ही कहा गया कि बैक डोर से कोल इंडिया को निजी हाथों में देने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है।

कई अनुषंगी कंपनियों में आउटसोर्सिग के भरोसे उत्पादन हो रहा है। वहीं ठेका मजदूरों की स्थिति पर चिंता प्रकट की गई। केंद्र सरकार की नीतियों की भी आलोचना की। हड़ताल के मुद्दे पर विभिन्न यूनियन नेताओं के वक्तव्य पर गौर करें तो आइपीओ के विरोध में स्पष्ट नीति का आभाव देखने को मिला।

एक वरिष्ठ यूनियन नेता ने हड़ताल स्थगित किए जाने पर बिफरते हुए कहा कि यह स्ट्राइक नोटिस देने के पहले सोचना चाहिए था। ऐन मौके पर इस तरह के निर्णय से मजदूरों के बीच यूनियनों की विश्वसनीयता घेटेगी। कईयों की राय अलग-अलग थी। सम्मेलन का आयोजन बीएमएस, सीटू, एचएमएस एवं एटक के द्वारा किया गया था। वैसे आमंत्रण पर इंटक के भी प्रतिनिधि पहुंचे।

सयुंक्त मोर्चा को मबूत रखने तथा आगे एकजुट होकर हड़ताल करने की बात भी कही गई। इंटक के ओपीलाल एवं एके झा सम्मेलन में मौजूद थे। सम्मेलन में कई वरिष्ठ यूनियन नेता शामिल हुए राज्य सभा सदस्य आरसी सिंह, रमेंद्र कुमार, सुरेंद्र पांडेय, वाइएन सिंह, एसके बक्शी, नाथूलाल, बीसी चौधरी, के अलावा दजर्नों की संख्या में स्थानीय यूनियन नेता भी मौजूद थे।

कोल इंडिया के आइपीओ के खिलाफ अब तक श्रमिक संगठनों द्वारा जितने भी आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए कोई भी सफल नहीं हुआ। सबसे पहले सीटू की ओर से हड़ताल असरदार नहीं रही। बीएमएस की ओर से अकेले दम पर हड़ताल की घोषणा वापस ली गई।

एक बार फिर चार यूनियनों बीएमएस, सीटू, एटक एवं एचएमएस की ओर से हड़ताल की घोषणा स्थगित हो गई है। मामले पर जानकार बताते हैं कि यूनियन नेताओं में आत्म विश्वास की कमी एवं महत्वपूर्ण मुद्दे पर स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण ऐसा हो रहा है। सवाल यह है कि मजदूर हड़ताल पर जाएंगे या नहीं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कोल सेक्टर में हड़ताल टली