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मेरी कामयाबी

वह क्यों उखड़े हुए हैं? सोचकर वह अकेले में ही मुस्करा पड़े। कल किसी ने कह दिया था कि तुम्हें जहां होना चाहिए था, वहां नहीं हो और वह परेशान हो गए थे। लेखक और प्रकाशक जेम्स एटलस कहते हैं कि हमें अपनी कामयाबी को खुद ही नापना चाहिए। अपने पैमाने पर खरा उतरना ही असल कामयाबी है। उनकी किताब ‘माई लाइफ इन द मिडिल एजेज’ खासा चर्चित हुई है।

हम कभी दूसरे की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सकते। अगर उतर भी रहे हों, तो उससे पहले हमें अपनी निगाहों में खरा उतरना होगा। दूसरे लोग हमसे क्या उम्मीद करते हैं? उससे ज्यादा जरूरी है यह जानना कि हमें अपने से क्या उम्मीदें हैं?

जेम्स का कहना है कि हमें कभी किसी के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। यह तुलना हमारी खुशियों के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट है। हमें अपने को देखना चाहिए। दूसरों को नहीं। हम दूसरों की बात सुन सकते हैं, लेकिन हमें क्या करना या होना है, उसके लिए फैसला तो हमारा ही होगा। इसीलिए हमें खुद देखना चाहिए कि हम क्या चाहते हैं? हम क्यों चाहते हैं? और हम कहां तक पहुंच सकते हैं?

हमें सबसे पहले अपने आपको जानना होता है। अपने को जान-समझ कर ही हम जिंदगी में आगे कदम बढ़ाते हैं। हम अपने लिए मंजिल तय करते हैं। फिर उसके बाद कोशिशें शुरू हो जाती हैं। अपनी मंजिल के लिए हम पूरी तैयारी करते हैं और यह मंजिल कोई जिंदगी में एक बार ही आने वाली चीज तो है नहीं।

हम एक दौर में कोई मंजिल तय करते हैं। उसे पा लेते हैं, तो दूसरी मंजिल तय कर लेते हैं। इसी तरह मंजिलों का सिलसिला चलता रहता है। एक मंजिल पाते ही दूसरे की हलचल शुरू हो जाती है। असल में जिंदगी जब तक चलती रहती है, तब तक कोई न कोई मंजिल हमारे लिए बनी रहती है।

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