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कहीं परशुराम संवाद तो कहीं वनवास की तैयारी

रामलीला का मंचन जमने लगा है। दर्शकों की भीड़ से कलाकार भी गद्द हैं। शनिवार की रात कहीं परशुराम-लक्ष्मण संवाद तो कुछ जगह राम वनवास का करुणा दृश्य देखने को मिला। चौपाई और संवादों पर जमकर बजी तालियां।

श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी द्वारा सेक्टर 15 आयोजित रामलीला में शिव धनुष टूटते ही परशुराम का प्रवेश होता है। कडम्कडम्ती आवाज में शिव का धनुष किसने तोडम सुन दर्शक तांलियां बजाने से नहीं रुकते। फिर शुरु होता है। परशुराम और लक्ष्मण के बीच संवाद का सिलसिला। युवा क्षत्रिय लक्ष्मण की बात सुन तपस्वी परशुराम क्रोधित हो उठते हैं। इनके डर से अन्य सभी क्षत्रिय राजाओं को होश उड़े हुए हैं। बात बिगडम्ती देख रघुकुल शिरोमणि राम भगवान परशुराम को संभालते हैं। इसके बाद अद्वितीय मेल देख दर्शक वाह-वाह कर उठते हैं। दर्शकों में सभी उम्र वर्ग के श्रोता शामिल हो रहे हैं। आयोजकों की माने तो पिछले साल की तुलना में दर्शकों की भीड़ बढ़ी है। विजय रामलीला कमेटी ने शनिवार की रात भगवान श्रीराम के वनवास का मंचन किया। इसे देख दर्शक भावविह्ल हो उठे। चौदह साल वनवास के लिए अयोध्या से श्रीराम पलायन किए। इनके साथ लक्ष्मण और मां सीता भी साथ हो चली। यह दृश्य लोगों को खूब रुला गया। वनवास की खबर सुनते ही अयोध्या में अजीब सन्नाटा पसर गया। सभी राजा दशरथ के इस फैसले पर अवाक थे। वहीं पर्दे पर विभिन्न जगहों पर रामानंद सागर कृत रामायण का प्रसारण दिखाया गया। वनवास और चित्रकुट प्रवास देखने का मौका दर्शकों को मिला। करो प्यारे पितर भक्ति अगर मुक्ति को पाना है, लगाओ मन को सेवा में अगर जीवन बनाना है, पिता है रुप शिवजी का तो माता रुप गौरी है, यही साधन यही पूजा इसी से पार ज्ञाना है, यह दुनिया चंद रोजा है यहां रहना नहीं हर दम, यही ठाकुर यही ईश्वर इन्हीं में मन लगाना है, यही जप है यही तप है यही भक्ति यही तीर्थ, फकत पूजा से है मतलब पर वाह कुछ न जाना है।
राम जिस तरह पिता की आज्ञा पालने के लिए वन को कुछ करते हैं, दर्शकों को सहसा श्रवण कुमार की याद आने लगती है।

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