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बच्चों से छोटे-छोटे काम कराएं, वे खुशहाल रहेंगे

बच्चों से छोटे-छोटे काम कराएं, वे खुशहाल रहेंगे

कुछ वर्षों पहले तक बच्चे घर के कामों में काफी हाथ बंटाया करते थे लेकिन अब ऐसा बहुत कम देखने को मिल रहा है। घर के ज्यादातार काम अब या तो माता-पिता करते हैं या फिर नौकरों के भरोसे होता है। एक अध्ययन से पता चला है कि 1997 की तुलना में इसमें लगभग 12 प्रतिशत की कमी आई है और 1981 की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।
आंकड़ा डरावना है और यही हाल रहा तो कुछ समय बाद बच्चों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी दूसरे पर निर्भर रहना होगा। गंभीर बात यह है कि समाज में जिस तरह से यूनिक फैमिली सिस्टम चल रहा है, यह लोगों को घर के काम अपने से करने के लिए बाध्य कर रहा है लेकिन स्थिति इसके ठीक उलट है।

इसमें माता-पिता का भी एक हद तक दोष है। आजकल के कई पेरेंटस भी बच्चों से घरेलू काम कराना नहीं पसंद करते हैं। राशन या दुकान तक के चक्कर काटने के लिए नौकरों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। बच्चे चाहे कम्प्यूटर पर गेम्स भी खेल रहे हों तो पेरेंटस उन्हें छोटे-मोटे काम के लिए कहना नहीं चाहते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि कुछ पेरेंटस अपने बच्चों को घर साफ-सुथरा रखने में या किचन में कुछ सिखाने की कोशिश भी करते हैं,तो बच्चे बड़े अनमने तरीके से इसे करते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में अभी बच्चों को घरेलू काम मसलन घर की सफाई, किचन में खाना बनाना, अपने कपड़े स्वयं धोना जैसे कामों की ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में प्रचलन घटता जा रहा है। इसमें खास बात यह है कि परिवार वाले लड़कों की अपेक्षा लड़कियों से घर के काम कराना ज्यादा पसंद करते हैं। मां-बाप की कोशिश रहती है कि लड़कियों को सारे घरेलू काम-काम आए ताकि शादी के बाद उसे कोई समस्या न हो। जबकि अमेरिका में शादी इसी बात पर कायम रहती है कि लड़के को भी घरेलू काम में मदद करना होगा। अगर लड़का घरेलू काम में मदद नहीं करता है तो वहां शादी बहुत जल्दी टूट जाती है।

वैसे आजकल भारत में भी शादी को कायम रखने के लिए लड़कों को घरेलू काम आना जरूरी है। नवविवाहित जोड़ों को यह बात समझ में भी आने लगी है इसीलिए जरूरी है कि बच्चों को घर के काम-काज कराने की आदत शुरू से ही डालनी चाहिए।

फोर्टिस अस्पताल से जुड़ी मनोचिकित्सक डॉ.वंदना प्रकाश का मानना है कि बच्चों को घरेलू काम-काम की ट्रेनिंग देनी बहुत जरूरी है। आजकल के लाइफ में जो बच्चा कामकाज नहीं सीख पाता है,उसके लिए जीवन में बहुत समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे बच्चे किसी भी काम को करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। सबसे बड़ी समस्या रिलेशनशिप में पैदा होती है।

पति-पत्नी ऐसी हालात में एक-दूसरे को समस्या की जड़ मानने लगते हैं। खाना बनाने या कपड़े धोने जैसे कामों को लेकर शादियां टूट जाती है। लीविंग इन रिलेशनशिप में भी काम-काज का आना काफी महत्वपूर्ण होता है। डॉ.प्रकाश का कहना है कि घरेलू काम-काम सिखने से जिम्मेदारी का अहसास होता है। बच्चे अपने माता-पिता या बुर्जुगों के प्रति जिम्मेदारी का अनुभव करता है।

अगर शुरुआत में ही घरेलू काम-काम नहीं सिखाया गया तो बाद में यह बहुत मुश्किल होता है। बच्चों को घरेलू काम की ट्रेनिंग 4-5 साल की उम्र से ही शुरू कर देनी चाहिए। मसलन स्कूल से आकर जूते जगह पर रखना,खेलने के बाद खिलौने नियत स्थान पर रखना,खाने के बाद बर्तन बेसिन में रखना आदि। ऐसे कामों से बच्चे में घरेलू काम में भी रुचि पैदा होने लगती है।

रिसर्च

वैसे आजकल भारत में भी शादी को कायम रखने के लिए लड़कों को घरेलू काम आना जरूरी हो गया है। नवविवाहितों को यह बात समझ में आने लगी है। जरूरी  है कि बच्चों को घर के काम-काज कराने की आदत शुरू से ही डालनी चाहिए।

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