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दो दूनी चार

दो दूनी चार

कहानी : दुग्गल सर (ऋषि कपूर) को अपनी बहन की ननद की शादी में मेरठ जाना है। बहन ने शर्त रखी है कि उन्हें सपरिवार कार में आना होगा। जेब तंग है और पत्नी कुसुम (नीतू सिंह) के सामने बहन को दिया वचन भी निभाना है। ऐसे में उन्हें अपने पड़ोसी फारुखी साहब (आखिलेंद्र मिश्र) की याद आती है, जो अपनी कार बेहद सहेज कर रखते हैं। फारुखी साहब की कार तो मिल जाती है, लेकिन उसे वापस करते समय आया डेंट मुसीबत बन जाता है। फारुखी की पत्नी बवाल खड़ा देती है। गुस्साए दुग्गल सर सारे मुहल्ले के सामने ऐलान कर देते हैं कि वो 15 दिन में नई कार खरीदने वाले हैं। इस ऐलान से दुग्गल सर का पूरा परिवार सकते में आ जाता है, क्योंकि कार खरीदने के लिए पैसे तो है ही नहीं।

निर्देशन : ऋषिकेश मुखर्जी के अंदाज में हंसते-गुदगुदाते बुलबुलों के साथ दुग्गल फैमिली की कहानी को पेश किया है हबीब फैजल ने। चूंकि कहानी अच्छी है और उसकी पटकथा के साथ भी काफी हद तक न्याय किया गया है, इस लिहाज से शुरु से अंत तक फैजल की ग्रिप बनी रही। फिल्म को अति मनोरंजक बनाने की गरज से किरादरों को लाउड नहीं किया गया है, जिससे बनावटीपन नहीं लगता। बेकार के हंसोड़ सीन्स भी नहीं ठूंसे गये हैं। यही वजह है कि तंग जेब का दर्द भी हंसी-खुशी घर साथ ले जाने का मन करता है। 

अभिनय : फिल्म में ऋषि-नीतू की बेहतरीन स्क्रीन कैमिस्ट्री है। हेलमेट बिना कसे, स्कूटर पर बैठे ऋषि कपूर को देख आपको अपने किसी टीचर की याद जरूर आएगी। नीतू सिंह को देख उन गृहिणियों का चेहरा याद आएगा, जो कम पैसों में जोड़-तोड़ कर हंसी-खुशी पूरा महीना निकाल लेती हैं। फारुखी साहब (अखिलेंद्र मिश्र) जैसे पड़ोसी हम सबके आस-पास बसते ही हैं। कहानी के अलावा एक एक्टिंग ही है, जिसकी वजह से यह फिल्म सोशल ड्रामा/कॉमेडी के नाम पर बोझ नहीं लगती।

गीत-संगीत: गीतों के बोल प्रभावी हैं। संगीत देसी अंदाज का है। संगीत जबान पर चढ़ने वाला नहीं है, पर दृश्यों के साथ फबता है।

क्या है खास: फिल्म की कहानी और उसका ट्रीटमेंट। ईनाम के लिए वॉशिंग पाउडर के पैकेट खरीदना, मेरठ वाले सीन्स और सितारों की ओरिजिनल एक्टिंग।

क्या है बकवास: एक स्कूल टीचर को जरूरत से ज्यादा तंगहाल दिखाया गया है। अध्यापकों की तनख्वाह अब इतनी भी कम नहीं रही।

पंचलाइन: हल्की-फुल्की कहानी और अच्छी एक्टिंग वाला प्योर एंटरटेनमेंट देखना चाहते हैं तो मौका मत गंवाइये। डोन्ट मिस।

सितारे:  ऋषि कपूर, नीतू सिंह, अर्चित खन्ना, अदिति वासुदेव, अखिलेंद्र मिश्र

निर्माता :  अरिंदम चौधरी/प्लानमैन मोशन पिक्चर्स और वाल्ट डिज्नी पिक्चर्स

निर्देशक, लेखक एवं संवाद: हबीब फैजल

गीत :  मनोज मुंतशिर

संगीत : मीट ब्रॉस अनजान अंकित

मनस्वी, छात्र, विकास पुरी:  अच्छी मूवी है। बच्चों की एक्टिंग करने वाले बाल कलाकार काफी अच्छे लगे।

विकास भारद्वाज, फिल्मकार, मधु विहार: निर्देशक की पकड़ अच्छी थी। काफी अच्छी  फिल्म है।

नीता, टीचर, हरि नगर: ऋषि-नीतू का अभिनय काफी बढ़िया लगा। गीत भी काफी अच्छे लगे। 

चैतन्य, छात्र, उत्तरी दिल्ली: सैंडी का अभिनय अच्छा लगा। कॉमेडी देख हंसते-हंसते मजा आ गया।


पी. एन. चावला, टीचर, केशव पुरम: विषय तो अच्छा है। थोड़ी और मेहनत की गई होती तो बहुत मजा आता।

सितारे :  इमरान हाशमी, नेहा शर्मा, अजर्न बाजवा, स्टैला अलान
निर्माता :  मुकेश भट्ट/विशेष फिल्म्स
निर्देशक : मोहित सूरी
संगीत : प्रीतम चक्रवर्ती

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