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क्रुक: इट्स गुड टू बी बैड

क्रुक: इट्स गुड टू बी बैड

कहानी : ऑस्ट्रेलिया में सूरज (इमरान हाशमी) की मुलाकात सुहानी (नेहा शर्मा) से होती है। सूरज को आए दिन भारतीय नागरिकों पर होने वाली नस्ली हमलों की चिंता सताती है। वह खुद भी जाली पासपोर्ट पर ऑस्ट्रेलिया आया है। यही वजह है कि वह गोल्डी भाई के कहने पर चुप रहता है। एक दिन जय की मुलाकात निकोल (स्टैला अलान) से होती है, जो रसेल की बहन है। रसेल ही वह ऑस्ट्रेलियाई युवक है, जो भारतीयों पर नस्ली हमलों की वारदातों से जुड़ा है। जय को पता चलता है कि रसेल समर्थ (अर्जन बाजवा) पर जानलेवा हमला करने वाला है। समर्थ, सुहानी का भाई है, जिसे बचाने के लिए जय अपनी जान पर खेल जाता है।

निर्देशन: मोहित सूरी के पास एक अच्छा विषय था, लेकिन इस बार वह ‘कलयुग’ और ‘वो लम्हे’ जैसा न्याय ‘क्रुक’ के साथ नहीं कर पाए। भट्ट कैंप की फिल्मों में कहानी, पटकथा और संगीत पर काफी मेहनत की जाती रही है, लेकिन ‘क्रुक’ इंटरवल से पहले काफी कमजोर लगती है। आधे से ज्यादा समय केवल भूमिका बनाने में गवां दिया गया है। इंटरवल के बाद कुछेक जगह ही फिल्म ठीक-ठाक लगती है। गोल्डी के किरदार के लिए कोई मंझा हुआ सितारा होना चाहिए था। अगर मोहित ने कहानी, पटकथा और संवाद पर मेहनत की होती तो शायद यह एक सरप्राइज पैकेज फिल्म बन पाती।

अभिनय: पहली फिल्म में नेहा ग्लैमरस के साथ-साथ कॉन्फिडेंट भी लगी हैं। अभिनय भी ठीक-ठाक है। इमरान का नया लुक अच्छा है, लेकिन एक्टिंग में वो स्पार्क नहीं है, जिसके लिए उन्हें पसंद किया जाता है। अच्छे संवादों की कमीं भी उनके किरदार को मार गयी। अर्जन की केवल फिजीक में दम है, आवाज और किरदार में नहीं। बाकी कलाकार सो-सो रहे। 

गीत-संगीत: प्रीतम की धुनें ऐसी नहीं हैं, जिन्हें बार-बार गुनगुनाने का दिल करे। यह फिल्म इमरान की म्युजिकल फिल्मों की तरह याद रखनी मुश्किल होगी।

क्या है खास: फिल्म का विषय अच्छा है। 

क्या है बकवास: बदले की आग के साथ समर्थ को केन्द्र में रख कर बनाया गया फिल्म का क्लाईमैक्स विषय से भटका देता है। इंटरवल के बाद समझ नहीं आता कि फिल्म किस दिशा में जा रही है।

पंचलाइन: लोग ये जानना चाहते थे कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हुए नस्ली हमलों के पीछे क्या कहानी थी, लेकिन ‘क्रुक’ एक हाफ बेक्ड स्टोरी की तरह है, जिसे देख पल्ले कुछ पड़ने वाला नहीं।

रिषभ, छात्र, कश्मीरी गेट:  अच्छी मूवी है। इमरान की एक्टिंग अच्छी लगी। संगीत भी अच्छा है।

गौरव शर्मा, छात्र, गुलाबी बाग: स्टैला के बिंदास सीन देख मजा आया। बाकी फिल्म कुछ खास नहीं है।

वरुण, छात्र, शास्त्री नगर: कहानी में दम नहीं है। गीत अच्छे हैं। इमरान-अजर्न दमदार लगे हैं।

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