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सरकार से 2,000 करोड़ रुपए मांगेगी एयर इंडिया!

सरकार से 2,000 करोड़ रुपए मांगेगी एयर इंडिया!

एयर इंडिया में 1,200 करोड़ रुपए की इक्विटी निवेश की प्रक्रिया अभी आकार लेने लगी है। वहीं आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि अपने भारी ऋण के भुगतान के लिए एयरलाइन अगले वित्त वर्ष में सरकार से 2,000 करोड़ रुपए की पूंजी की और मांग कर सकती है।

एक आधिकारिक अनुमान के अनुसार, एयरलाइन को अपने कर्ज के भुगतान के लिए सालाना 3,000 से 4,000 करोड़ रुपए की जरूरत है। विमानों की खरीद की वजह से एयरलाइन पर कर्ज का यह भारी बोझ पड़ेगा।

सूत्रों ने कहा कि इस तरह एयरलाइन पर मासिक 200 करोड़ रुपए का ब्याज का बोझ रहेगा, वहीं मासिक कर्ज का बोझ 300 करोड़ रुपए पड़ेगा। सूत्रों ने कहा कि इस वजह से एयरलाइन अगले वित्त वर्ष में सरकार से 2,000 करोड़ रुपए की और पूंजी की मांग कर सकती है।

पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने एयरलाइन में 800 करोड़ रुपए का निवेश किया था। वहीं नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन में 1,200 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी डालने के लिए एक नोट तैयार किया है, जिसे आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) के पास विचारार्थ भेजा जाएगा।

सीसीईए की मंजूरी के बाद सरकारी फंड की दूसरी किस्त जारी की जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल कंपनी का ऋण का बोझ कम करने के लिए किया जाएगा।

सीसीईए द्वारा इस प्रस्ताव पर अगले महीने विचार किए जाने की उम्मीद है। उस समय महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम मसलन राष्ट्रमंडल खेल और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की यात्रा संपन्न हो जाएगी। सरकार जिस समय इक्विटी डालने पर विचार करेगी, उस समय एयरलाइन अपनी छह रणनीतिक कारोबारी इकाइयों (एसबीयू) के परिचालन के लिए भी मंत्रिमंडल की मंजूरी मांगेगी।

ये एसबीयू कम लागत वाली एयरलाइन, कार्गो, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ), ग्राउंड हैंडलिंग, इंजीनियरिंग और संबंधित व्यवसाय हैं, जिन्हें राजस्व बढ़ाने के लिए अलग मुनाफा केंद्रों के रूप में परिचालित किया जाएगा।

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