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चुनावी शोर में गुम हुआ साक्षरता अभियान

बिहार विधानसभा चुनाव के शोर में निरक्षरों और नवसाक्षरों के लिए चल रहे अभियान गुम हो गए हैं। चुनावी माहौल में साक्षरता अभियान का कबाड़ा हो रहा है। राज्य और केन्द्र दोनों सरकारें चुनाव आयोग के डंडे की वजह से नए फैसले लेने से पहले से ही बचती रही है ताकि उनपर इस मौसम में कोई आरोप न लग जाय। इस पेंच में राज्य ने अपनी योजना मुख्यमंत्री अक्षर आंचल को तब विस्तार नहीं दिया जब बगैर अभ्यास के नवसाक्षर महिलाएं अपना ताजा ज्ञान भूल सकती हैं। जबकि योजना की कुछ राशि भी अभी सरकार के पास बची है। उधर केन्द्र सरकार ने भी अक्षर भारत अभियान को विस्तार देने में बिहार को दरकिनार कर दिया है।


आधिकारिक सूत्रों की मानें तो साक्षरता में पिछड़े बिहार ने अपने सभी 38 जिलों में इस योजना के संचालन की मांग की थी। पहले चरण में केन्द्र ने भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया में ही इसकी शुरुआत की है। साक्षर भारत के तहत सभी असाक्षरों को अक्षरबोध कराना है और निरक्षरों की संख्या के आधार पर ही केन्द्र इसके लिए राशि भी आवंटित कर रहा है। पात्रता रहने के बावजूद बिहार के 35 जिले साक्षर भारत की सुविधा से वंचित हैं। हालांकि बिहार का मानव संसाधन विकास विभाग सभी जिलों को लेकर प्राक्कलन बना रहा है शीघ्र ही उसे केन्द्र के पास भेजा जाएगा पर संकेत है कि उसे हरी झंडी नवम्बर बाद ही मिलेगी। इस बीच बिहार के लिए खुशी की बात यह है कि कई जिलों में शिक्षकों व उच्च माध्यमिक की छात्रएं स्वेच्छा से अक्षर आंचल केन्द्र संचालित कर रही हैं। सरकार ने तो 8 सितम्बर को विधिवत इसका समापन समारोह आयोजित करा दिया पर बगैर किसी सरकारी सुविधा ये केन्द्र चल रहे हैं और नवसाक्षर महिलाएं रोज पढ़ने पहुंच रही हैं।

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