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आयोग ने पहले ही नजर गड़ा दी थी

इस बार यूपी के पंचायत चुनाव की आहट होते ही जिस तरह से गांवों में शराब और उसके साथ मौत बंटनी शुरू हुई, उसने राज्य निर्वाचन आयोग को चौकन्ना कर दिया। इसे रोकने के लिए आयोग ने सख्त आदेश जारी किया। प्रदेश में पंचायत चुनावों के इतिहास में यह पहला मौका था कि आयोग ने अधिसूचना जारी होने के एक दिन पहले से ही तत्परता दिखाई और पूरी स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।


आयोग ने तमाम जिलों में जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों को देखते हुए आबकारी विभाग को संदिग्ध ठिकानों पर छापा मारने तथा धरपकड़ शुरू करके अवैध शराब के धंधे को रोकने के निर्देश दिए। इसके लिए पहली बार प्रवर्तन कार्यो में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी  से मुक्त किया गया। पंचायत चुनावों और शराब का चोली-दामन का साथ रहा है। प्रभावशाली लोग गरीब तबके के लोगों का वोट हथियाने के लिए यह नुस्खा अपनाते रहे हैं। अमूमन मतदान की तिथि नजदीक आने पर ही इस तरह की दावतें होती थीं मगर इस बार दारू की ऐसी दावतें काफी पहले से होने लगीं। आयोग को यह सूचनाएं मिल रही थीं कि प्रदेश में लोकल शराब बनाकर बेची जा रही है। दूसरे राज्यों से भी प्रदेश में शराब की तस्करी  हो रही है। जहरीली शराब से मौतें जब सुर्खियाँ बनने लगीं तो राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेन्द्र भौनवाल ने जिलाधिकारियों से सीधे बात करके इसे रोकने के निर्देश दिए। साथ ही आयोग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को विस्तृत निर्देश जारी किए। इसकी कॉपी प्रमुख सचिव आबकारी तथा आबकारी आयुक्त को भी भेजी गई। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि 15 सितम्बर से 31 अक्टूबर के बीच हो रहे चुनाव के दौरान अवैध मदिरा, रेक्टिफाइड स्प्रिट, मिथाइल अल्कोहल आदि की बड़े पैमाने पर बिक्री हो सकती है। इसे रोकने के लिए लोगों को अवैध व जहरीली शराब के खिलाफ जागरूक करने और अवैध शराब की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की जरूरत है। उन्होंने इसके लिए प्रवर्तन कार्य को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। आयोग आबकारी विभाग द्वारा मारे जा रहे छापों की प्रगति पर सतत निगाह रखे हुए है।

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