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कृष्ण गोपाल यादव को विरासत में मिली रामलीला

पहले पिता, फिर कृष्ण गोपाल यादव इसके बाद भांजे-भांजी और अंत में भांज बहू भी हो गयी रामलीला मंडली में शामिल, जिसके चलते ‘आकृति कला कें्रद’ में हो गया यादव परिवार का आधिपत्य। ये कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। एक ही परिवार के पांच सदस्य शौकिया तौर पर कर रहे है सालों से रामलीला।  


ट्रांस हिंडन क्षेत्र के इंदिरापुरम में आयोजित होने वाली रामलीला में मंचन करने आई मुरादाबाद की मंडली साधारण होते हुए भी कुछ खास है क्योंकि इस मंडली में पांच सदस्य एक ही परिवार से हैं। मंडलीे के प्रधान और संगीत निर्देशक कृष्ण गोपाल यादव है। इनका बडम भांजा अर्जुन भगवान राम की भूमिका में, भांज बहू प्रिया सीता माता की भूमिका में, छोटा भांजा आशीष यादव निभाता है हास्य कलाकार का किरदार तो वहीं भांजी शैफाली मंच का करती है नृत्य।  कृष्ण गोपाल ने बताया कि उनके रामलीला में जुडम्ने से पहले उनके पिता दिवंगत रामचरण दास इस रामलीला के संगीत निर्देशक और प्रधान थे, जिन्होंने अपने जीवने के 50 सालों तक इस रामलीला मंडली को अपने खून से सिचा और जीवन के अंतिम दिनों तक वे इस रामलीला में कार्यरत रहें,जो पेशे से गायक थे। इनके स्वर्गवास हुए तीन साल हो चुके है। वे आग बताते है कि वे इस रामलीला में 32 वर्षों से जुडम्े हुए हैं, जबकि वे अपनी असल जिंदगी में बिजनसमैन है। उनका कहना है कि  रामलीला से जुडम्ना वे अपना और अपने परिवार का सौभाग्य मानते है। अर्जुन का कहना है कि वे अपने मामा कृष्ण गोपाल से प्रेरित होकर 14 साल पहले रामलीला मंडली का हिस्सा बने थे। इसके बाद उनके बहन-भाई भी इस मंडली में शामिल हो गए, जो पिछले पांच सालों से इसका हिस्सा बने हुए हैं। वे आगे बताते है कि वे पेशे से एमआर है, जबकि प्रिया एमबीए की पढमई कर रहे है। वहीं शैफाली का कहना है कि अपने नाना, मामा और भाई को रामलीला में काम करते देख उन्हें व उनके  छोटे भाई को बहुत अच्छा लगता था। इसलिए उन्होनें और उनके भाई ने अपनी पढमई के साथ-साथ रामलीला में भी काम करने का मन बना लिया। वे ग्यारवी कक्षा की छात्र है जबकि उनका भाई जामिया में फाइन आर्टस से ग्रेजुएशन कर रहा है।

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