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जब सिपाही ड्यूटी पर नहीं थे तो क्यों रखी थी पिस्टल

अमृतपुरम् प्रकरण में पुलिस वालों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। यह सरकारी हथियारों का बेजाया इस्तेमाल करने का मामला हो सकता है। ‘पुलिस रेगुलेशन’ और ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ का खुला उल्लंघन किया गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जब सिपाही सादी वरदी में थे तो, उनके पास सरकारी हथियार क्यों था।


पीड़ित युवकों ने बताया कि सिपाही नरेश और राकेश सादी वर्दी में थे। विवाद होने पर पिस्टल तान दी। पिस्टल छीनने पर ही पुलिस वाले बौखला गए। शस्त्र आवंटन नियमों के मुताबिक कांस्टेबल को पिस्टल आवंटित नहीं किया जाता है। ड्यूटी के बाद ही सादे कपड़ों में रह सकता है। जब सिपाही ड्यूटी पर नहीं थे तो, उनके पास पिस्टल क्यों था। अगर ड्यूटी पर थे तो, बावर्दी क्यों नहीं थे। पिस्टल किसी अधिकारी की सुरक्षा में तैनात सिपाही को दी जा सकती है। वही चौबीसों घंटे अपने पास हथियार रख सकते हैं। लेकिन, ये सिपाही किसी पुलिस अफसर की सुरक्षा में भी तैनात नहीं हैं। सादे कपड़ों में ड्यूटी पर रहने की छूट केवल ‘स्पेशल ऑपरेशनल ग्रुप’ के सदस्यों को दी जाती है। इन सारे सवालों के जवाब कोई देने के लिए तैयार नहीं है। साफ जाहिर होता है कि पुलिस वाले मन मुताबिक सरकारी हथियारों का प्रयोग कर रहे हैं। कोड ऑफ कंडक्ट पर कोई अमल करने का तैयार नहीं है।
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‘पुलिस का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक है। इससे कानून-व्यवस्था को बार-बार खतरा उत्पन्न हो रहा है। एसएसपी-डीएम से बात की गई है। दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।’

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