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क्या ये टीम वर्क है

आखिर उनकी टीम को क्या हो गया है? वह थकी-थकी और उखड़ी हुई क्यों नजर आती है? कुछ वक्त पहले ही तो उन्होंने अपने बेहतरीन कर्मी को प्रमोशन दी थी। उसके बाद टीम का काम गिरता ही चला जा रहा है।

स्टीव कोजलोवस्की और उनकी टीम का मानना है कि हम टीम वर्क की बात तो करते हैं, लेकिन ज्यादातर जगहों पर टीम से ज्यादा व्यक्ति के काम को तरजीह दी जाती है। इसीलिए टीम को नहीं व्यक्ति को प्रमोशन मिलता है और उसी की वजह से टीम के काम पर असर पड़ता है। उन्होंने टीम वर्क पर काफी काम किया है। 

हाल ही में उनकी टीम ने एक रिसर्च पेपर तैयार किया है। उसे ‘द जर्नल ऑफ ऐप्लाइड साइकोलॉजी, पर्सनल साइकोलॉजी ऐंड साइकोलॉजिकल साइंस इन द पब्लिक इंटरेस्ट’ में छापा गया है। हमें अजीब लग सकती है स्टीव की बात। आखिर हम किसी के काम को सराहेंगे नहीं, तो काम कैसे चलेगा।

टीम तो कुल मिलाकर व्यक्ति ही बनाते हैं न। एक-एक के काम से ही तो टीम आगे बढ़ती है, लेकिन स्टीव अपनी रिसर्च से दूसरी बात साबित करते हैं। उनकी रिसर्च बताती है कि जब हम किसी व्यक्ति को ज्यादा तरजीह देते हैं, तो टीम टूटने लगती है। उनका मानना है कि टीम वर्क तो तभी परफेक्ट होगा, जब पूरी यूनिट को ही ईनाम या सजा दी जाएगी। किसी एक को ईनाम या सजा देने से टीम वर्क बन ही नहीं सकता।

असल में टीम वर्क के लिए सबसे जरूरी चीज वह भावनात्मक लगाव को मानते हैं। पूरी टीम जब भावनात्मक रूप से जुड़ी होती है, तो कमाल का काम होता है। इसीलिए टीम वर्क के लिए सबको भावनात्मक तौर पर जोड़ना जरूरी है। जब टीम के हर व्यक्ति को महसूस होगा कि उसका सब कुछ टीम पर जुड़ा है, तो पूरा माहौल बदल जाएगा। तब हर शख्स अपने बारे में ही नहीं सोचेगा।

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