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घर के चिराग से ही आग का खतरा

मंत्रिमंडल का विस्तार कर अर्जुन मुंडा ने एक और बाधा पार कर ली है। अब विभाग बंटवारे से कोई नया विवाद नहीं हो इसका ख्याल किया जा रहा है। लेकिन कैबिनेट गठन के साथ ही परिस्थितियां साफ नजर आने लगी है कि घर के चिराग से ही आग लगने का खतरा है। विपक्ष फिलहाल दूर से ही सत्ता पक्ष में खटराग बढ़ने का इंतजार कर रहा है।

झामुमो के चार विधायकों ने मोरचा खोल दिया है। और भाजपा में अंदर ही अंदर कुलबुलाहट है। आजसू में भी कमलकिशोर भगत की नाराजगी झलकने लगी है। शपथ ग्रहण समारोह में भगत शामिल नहीं हुए थे। ये परिस्थितियां बनने के साथ ही अर्जुन मुंडा और उनके नायाब सुदेश महतो तथा हेमंत सोरेन डैमेज कंट्रोल की कवायद में जुट गए हैं।

शुक्रवार की सुबह सुदेश और हेमंत मुंडा के साथ काफी देर तक बैठे थे। अंदरखाने की खबर है कि नीलकंठ सिंह मुंडा, बड़कुअंर गगरई, कमलकिशोर भगत तथा टेकलाल महतो को तत्काल एडजस्ट करने पर राजनेताओं ने चर्चा की है। उन्हें बोर्ड निगम में शामिल किया जाए या और कोई रास्ता निकाला जाए, इस पर नेताओं ने मगजमारी की है। दूसरे राज्यों में ऐसी परिस्थिति में मंत्रिमंडल से इतर अच्छे ओहदे पर विधायकों को कैसे एडजस्ट किया गया है, इस पर भी माथा लड़ाया जा रहा है।

झारखंड में पहले संसदीय सचिव बनाकर विधायकों को एडजस्ट करने की कोशिशें की जा चुकी है। लेकिन संसदीय सचिव की भूमिका से विधायक असंतुष्ट थे। झामुमो इसे समझ रहा है कि टेकलाल को एडजस्ट करने से साइमन की मुहिम ढीली पड़ सकती है।

रघुवर दास की चुप्पी का भी इंतजार किया जा रहा है। वैसे रघुवर कोई ऐसा कदम नहीं उठायेंगे जिससे उनकी भूमिका पर अंगुली उठे, लेकिन भाजपा के असंतुष्ट दास सं संपर्क बढा सकते हैं। अरूण मंडल ऐन मौके पर मंत्रिमंडल से आउट हुए हैं। उन्हें खटक सकता है कि पार्टी में दो फर्स्ट टाइमर विधायकों को जगह दी गई।

झामुमो विधायक अकील अख्तर भी आखिरी तक उम्मीद लगाए बैठे थे। झामुमो के अंदर इसकी चर्चा है कि अकील को भी वक्त का इंतजार है। ऐसे वह शिबू के प्रति वफादारी ही जता रहे हैं। लेकिन उनके समर्थक गुस्से में हैं। तमाम परिस्थितियों को भांपते हुए रात में भी मुंडा और सरकार के रणनीतिकारों ने एडजस्टमेंट पर चर्चा की।

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