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विद्यार्थी तय करें ‘मिशन-2030’ का लक्ष्य

पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने देश का भविष्य तय करने वाले होनहारों से ‘मिशन-2030’ का लक्ष्य तय करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, विद्यार्थी अपना लक्ष्य तय करके ईमानदारी, सच्चई और साहस के साथ खुली आँखों से सपना देखें और इसे साकार करने के लिए प्रयासरत रहें। वादा किया कि भले ही वह 2030 में सौ वर्ष के हो जाएँ, लेकिन विद्यार्थियों के लक्ष्य की मंजिल का हाल जानने जरूर आएँगे। मिसाइल मैन डॉ. कलाम शुक्रवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन के रजत जयंती वर्ष समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लेने आए थे।


छात्र-छात्रओं को संबोधित करते हुए डॉ. कलाम ने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या राजनेता बनने के लिए संस्कारों के साथ-साथ लगातार परिश्रम भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामूहिक युवा शक्ति ही एक महान राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। इसके लिए डर को दिमाग से निकालकर खुद पर विश्वास करें, तभी लक्ष्य को भेदकर न केवल आप सफलता की राह पर बढें़गे, बल्कि देश का नाम भी रोशन करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को इस बात की शपथ भी दिलाई। कहा कि  सच्चई व्यक्ति के दिल में होती है जबकि माता- पिता के बाद केवल प्राथमिक शिक्षक ही बच्चाों में सच्चई का मंत्र भरता है। संस्कार और संस्कृति ही व्यक्ति और देश को महान बनाती है। सच्चाई से सृजनात्मकता आती है। इससे व्यक्ति अध्ययनशील होता है। लगातार अध्ययन से सोच पैदा होती है और सोचने की ताकत ज्ञान में वृद्धि करती है। बोले, विद्यालय से निकलने के बाद दोस्त तो पीछे छूट जाते हैं लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। यही ज्ञान मन में साहस पैदा करता है और साहस डर दूर करके सफलता के आयाम दिलाता है। इसके बाद लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाता है। उन्होंने सलाह दी कि लगातार प्रयासों के बाद ही एक्सीलेंस हासिल हो सकती है। इस मौके पर डॉ. कलाम ने ज्ञान विज्ञान प्रदर्शनी का उद्घाटन कर 25 मेधावी छात्र-छात्रओं को पुरस्कृत किया। प्रधानाचार्य अंगद सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति का स्वागत किया।

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