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प्रदेश सरकार मुकदमा वापस लेने की कार्रवाई कर रही है

वर्ष 2004 में डीएम आवास पर पथराव, आगजनी और सुजडू चुंगी पुलिस चौकी फूंकने के मामले में न्यायालय ने सांसद कादिर राना समेत 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस दौरान सांसद भी कोर्ट में ही उपस्थित रहे। प्रदेश सरकार ने इस मुकदमें को वापस लेने की कार्रवाई कर रखी है, लेकिन मुकदमा चुनाव से जुड़ा होने के कारण अभी तक चुनाव आयोग की अनुमति नहीं मिली।


पांच अक्टूबर को एडीजे नवम ने एसके बनर्जी ने कोर्ट में उपस्थित न होने पर सांसद कादिर राना और अन्य आरोपियों के  खिलाफ वारंट जारी कर दिए थे। छह अक्टूबर को कादिर राना ने कोर्ट में पेश होकर वारंट रिकॉल करा लिए थे। न्यायालय ने इस मामले में आरोप तय करने के लिए आठ अक्टूबर नियत की थी। शुक्रवार को न्यायालय ने आरोपी कादिर राना, शाहिद राना, सोमपाल सिंह, इनाम, ममनून अली, रिफाकल अली, मेहताब अली, फईम आढ़ती, तारिक अली, मुनकाद, अब्दुल्ला पर आरोप तय कर दिए हैं। यह मुकदमा दस मई 2004 को दर्ज हुआ था। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपियों पर प्रथम दृष्टया 147, 148, 149, 188, 307, 336, 353, 341, 342, 427, 436 आईपीसी, सेवन अपराध कानून एवं पीपीडीपी एक्ट के तहत आरोप विरचित करने का मामला बनता है। प्रदेश सरकार ने करीब 11 माह पहले सांसद कादिर राना और उनके भाईयों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन इस मामले में अभी भी पेंच फंसा हुआ है।

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