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पूर्व सरकार के निर्णय नयी सरकार के लिए बाध्यकारी: अदालत

पूर्व सरकार के निर्णय नयी सरकार के लिए बाध्यकारी: अदालत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि पूर्व सरकार द्वारा लिया गया निर्णय नयी सरकार पर बाध्यकारी है, जब तक कि पहली सरकार का निर्णय असंवैधानिक, दुर्भावनापूर्ण व गंभीर रूप से कानूनी खामियों वाला न हो। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार पर दो लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है।

न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति वेदपाल की खंडपीठ ने यह फैसला हरकोर्ट बटलर तकनीकी संस्थान कानपुर में एक प्रोफेसर की नियुक्ति के मामले में सुनाया। एक मई 2007 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा प्रोफेसर की नियुक्ति का अनुमोदन किया गया था लेकिन चुनाव के कारण नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ था। इसके बाद प्रदेश में नयी सरकार बनी और नये मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने चार जून 2007 को यह कहते हुए डा़ यदुवीर सिंह के चयन का निर्णय निरस्त कर दिया कि चयन समिति का गठन उपयुक्त नहीं है।

डा़ सिंह ने चार जून 2007 को इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। अदालत ने याचिका मंजूर करते हुए इस आदेश को निरस्त कर दिया और साथ ही राज्य सरकार पर दो लाख रुपये का हर्जाना भी ठोका है।

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