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चिन्नास्वामी में रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

चिन्नास्वामी में रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

मोहाली में वीवीएस लक्ष्मण की जुझारू पारी की मदद से ऑस्ट्रेलिया पर 1-0 की बढ़त बनाने के बाद भारत जब शनिवार से बेंगलूर के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम पर दूसरे और अंतिम टेस्ट के लिए उतरेगा तो उसका लक्ष्य इस मैदान पर अपने रिकॉर्ड में सुधार करना होगा जहां वह पिछले डेढ़ दशक में टेस्ट जीतने में विफल रहा है।
    
चिन्नास्वामी स्टेडियम में भारत का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है और वह यहां खेले 18 मैचों में से केवल चार में जीत दर्ज करने में सफल रहा है जबकि छह में उसे शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा यहां खेले उसके आठ मैच ड्रा रहे।
    
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में बामुश्किल एक विकेट की जीत दर्ज करने में सफल रहे भारत के लिए यह भी चिंता का सबब हो सकता है कि अक्टूबर 1995 में न्यूजीलैंड को आठ विकेट से हराने के बाद वह यहां कभी जीत का स्वाद नहीं चख पाया है।
    
दूसरी तरफ सीरीज़ में 0-1 से पिछड़े ऑस्ट्रेलिया का मनोबल इस तथ्य से बढ़ा हुआ होगा कि उसने यहां खेले चार मैचों में से दो में जीत हासिल की जबकि उसे कभी शिकस्त का सामना नहीं करना पड़ा। बेंगलूर में बल्लेबाजी में महेंद्र सिंह धोनी की टीम की उम्मीदों का दारोमदार एक बार फिर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग की अनुभवी चौकड़ी पर होगा जबकि गेंदबाज़ी में हरभजन सिंह और ज़हीर खान को एक बार फिर मोर्चे से अगुआई करनी होगी।

चिन्नास्वामी स्टेडियम पर तेंदुलकर के बल्ले ने खूब रन बटोरे हैं और वह अगर शनिवार से शुरू हो रहे टेस्ट में 43 रन बनाने में सफल रहते हैं तो सुनील गावस्कर को पीछे छोड़कर इस मैदान पर सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बन जाएंगे। तेंदुलकर ने इस मैदान पर अब तक सात मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक की मदद से 50.72 की प्रभावी औसत के साथ 558 रन बनाए हैं जबकि गावस्कर के नाम पर 600 रन दर्ज हैं। तेंदुलकर इसके अलावा 27 रन बनाते ही टेस्ट क्रिकेट में 14 हज़ार रन पूरे बनने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज़ बन जाएंगे।
    
तेंदुलकर के अलावा सहवाग ने भी बेंगलूर के दर्शकों को अपनी बल्लेबाज़ी का खूब जल्वा दिखाया है और उन्होंने यहां चार मैचों में 56.42 की बेजोड़ औसत से 395 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल हैं।
    
मध्यक्रम के दो अहम बल्लेबाजों द्रविड़ और लक्ष्मण की इस मैदान पर विफलता से हालांकि टीम इंडिया की चिंता बढ़ा सकती है। द्रविड़ अपने घरेलू मैदान सात मैचों में 21 से कुछ अधिक की खराब औसत से केवल 282 रन ही बना पाए हैं जिसमें कोई शतक शामिल नहीं हैं जबकि मोहाली के हीरो लक्ष्मण नाम पर यहां छह मैचों में 26.5 की औसत से केवल 219 रन दर्ज हैं।
     
दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया को अपने कप्तान रिकी पोंटिंग, उप कप्तान माइक क्लार्क, साइमन कैटिच और माइकल हसी के अलावा तेज़ गेंदबाज़ मिशेल जॉनसन से काफी उम्मीदें हैं। पोंटिंग और हसी ने भारत के खिलाफ यहां पिछले मैच में अक्टूबर 2008 में शतक बनाए थे जबकि कैटिच ने यहां दो मैचों में 55 की औसत से 220 जबकि क्लार्क ने 46.25 की औसत से 185 रन बनाए हैं। जॉनसन ने भारत के खिलाफ यहां अपने एकमात्र मैच में पांच विकेट चटकाए हैं।

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