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सीआईए की थी भारत को तोड़ने की साजिश

मालेगांव धमाके के 452 गवाहों में से एक गवाह ने चौकाने वाला खुलासा किया है। उसके मुताबिक सेंट्रल इंटीलिजेंस एजंसी (सीआईए) ने भारत को विभाजित कर यहां एक छोटा स्वतंत्र देश बनाने की योजना तैयार की थी। हालांकि इस योजना के तहत नए देश की स्थापना वर्ष 2015 तक करने की थी। इस गवाह का बयान मकोका कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में दर्ज है। यह गवाह आर्मी एजुकेशन कॉर्प का एक अधिकारी है। उसने यह भी बताया है कि वह 12 अप्रैल 2008 को भोपाल के राम मंदिर में आयोजित बैठक में शामिल था। वह उस समय चकित रह गया जब उसने देश को बांटने वाली योजना के बार में सुनी। उसने बताया है कि इस बैठक में रॉ का एक पूर्व अधिकारी भी उपस्थित था और उसी तरह से आपरशन करने पर विचार किया जा रहा था जिस तरह से सोवियत संघ को बांटा गया था। इस गवाह ने यह भी बताया है कि इस तरह की बैठक पर केंद्रीय खुफिया की नजर थी। यह गवाह लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित से मिला था और उसके कहने पर वह बैठक में शामिल हुआ था। पुरोहित ने उसे धमाके के अन्य आरोपियों से मिलाया था। देश को बांटने की योजना को सफल करने के लिए ही अभिनव भारत नामक संस्था का गठन किया गया था। चार्जशीट के मुताबिक बीते साल फरीदकोट में 26 जनवरी को विद्रोह का बिगुल बजा था। यहां पुरोहित ने विस्फोटक मुहैया कराने के साथ पूरी जिम्मेदारी ली थी। उसने सुधाकर चतुव्रेदी को साथ लिया और उसके दो लोगों को विस्फोट करने की योजना को अंजाम देने के लिए चुना था। इस बैठक के ढाई महीने के बाद विस्फोट की जगह मालेगांव तय की गई थी। भोपाल में आयोजित 11 अप्रैल 2008 की बैठक में पुरोहित व सुधाकर के साथ पूर्व मेजर रमेश उपाध्याय, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, समीर कुलकर्णी और दायनंद पांडे उपस्थित थे। यहां मालेगांव में धमाके करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया था। इसके बाद साध्वी ने जुलाई 2008 को रामचंद्र कालसांग्रा और संदीप डांगे को सुधाकर से मिलाया और पुरोहित ने उसे विस्फोटक देने की बात की। अगस्त 2008 में उज्जन के एक मंदिर में विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद राकेश धावड़े ने प्रवीण मुतालिक को बम बनाने की ट्रेनिंग दी। कश्मीर में जब पुरोहित था तब उसने विस्फोटक मुहैया कराया और उसे रामजी एवं डांगे को दिया था। इस समय रामजी, डांगे और मुतालिक फरार है। पुरोहित ने अखंड भारत के निर्माण की कल्पना की थी और इसके लिए वह नेपाल, थाइलैंड और इजरायल जसे देशों से भी सहयोग लेने वाला था। पुरोहित ने अपने दो खास लोगों को नेपाल मे तैनात किया था। इन दोनों का रिकार्ड दयानंद पांडे के लैपटॉप में है। इस लैपटॉप को एटीएस ने जब्त किया है। नेपाल के लिंगेश कुमार और सूबेदार सिंह के साथ डाक्टर आरपी सिंह ने बैठक ली थी और उसे माओवादियों के संपर्क में रहने के लिए कहा गया था। चार्जशीट के मुताबिक पुरोहित ने अप्रैल 2008 की बैठक में इजरायल और थाइलैंड के साथ संपर्क की बात का खुलासा किया था। चार्जशीट में यह भी जिक्र है कि मालेगांव धमाके के आरोपियों ने मुस्लिम आतंकियों की राह पर चलने का निर्णय लिया था।

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