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बेरोजगारों के साथ भद्दा मजाक

जिले में वर्षो बाद विज्ञापन संख्या-1/10 के आलोक में चतुर्थवर्गीय पद के लिए मेधा सूची तैयार कर 61 बेरोजगारों का चयन किया गया। कई प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद सफल अभ्यर्थी और उनके परिजन सरकारी नौकरी मिलने की खुशी मना ही रहे थे, कि उन्हें नियुक्ति-पत्र की बजाए अनुशंसा-पत्र थमा दिया गया। दरअसल, कोई भी विभाग इस पत्र को नहीं मान रहा है और योगदान लेने की बजाए उन्हें बैरंग लौटा दे रहा है।

दरअसल, नियुक्ति-पत्र के नाम पर डीसी की ओर से उन्हें जो पत्र दिया गया है, उसमें हर विभाग के रिक्त पदों के लिए अनुशंसा-पत्र है। पत्र में अधीनस्थ रिक्त चतुथवर्गीय पदों पर देय वेतनमान और भत्ते के साथ औपबंधिक रूप में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी के नाम की अनुशंसा की गई है। अनुशंसा पत्र लेकर कोई थाने, तो कोई इंदिरा गांधी विद्यालय, तो कोई अन्य विभागों के चक्कर लगाकर मायूस होकर लौट रहा है। कहीं भी उनकी ज्वाइनिंग नहीं हो पा रही है।

इससे पूर्व, चतुर्थवर्गीय पद के लिए उपायुक्त स्तर से रिक्तियां निकाल कर आवेदन मांगे गए, जिसमें 12 हजार 777 बेरोजगारों ने नौकरी की आस में आवेदन भरा था। इससके आधार पर 8 अगस्त 10 को लिखित परीक्षा हुई और 29 को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर 122 अभ्यर्थियों की मेधा सूची तैयार की गई। 29.9.10 को जिला पैनल निर्माण समिति के निर्णय के आलोक में 61 अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग के नाम पर जो पत्र दिया गया, वह मात्र अनुशंसा भर है। इससे पहले भी ढाई-तीन साल पूर्व भी चतुर्थवर्गीय पदों पर बहाली हुई थी, तब सभी को नियुक्ति पत्र दिए गए और तत्काल सभी की ज्वाइंनिंग भी हो गई थी।

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