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कॉमनवेल्थ के मेहमानों की सुरक्षा में तैनात यूपी पुलिस

यूपी पुलिस के कमांडोज जो कि साए की तरह कॉमनवेल्थ गेम्स में पधारे विदेशी मेहमानों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं, उनके मन में अपने मेहमानों से बातचीत करने की तमन्ना एक कसक बनकर रह गई है। ये कमांडो विदेशी मेहमानों से खुलकर बातचीत करना चाहते हैं, मगर अंग्रेजी भाषा का ज्ञान न होना इनके बीच एक बड़ी बाधा बन गया है। इसी के चलते जवानों और विदेशी मेहमानों के बीच का रिश्ता महज यस सर, नो सर और हाय हैलो कहने के शिष्टाचार तक ही सिमट गया है। दूसरी तरफ विदेशी मेहमानों को सैर सपाटा कराने वाले डीटीसी के ड्राइवर भी उक्त व्यथा ङोल रहे हैं। यूनिवर्सिटी के छात्र विदेशी मेहमानों और स्थानीय शॉप कीपर्स के बीच बातचीत कराने की निशुल्क सेवा मुहैया करा रहे हैं।


कॉमनवेल्थ खेल देखने या फिर उनमें भाग लेने वाले खिलाड़ी, कोच एवं अन्य विदेशी मेहमानों को सैर सपाटे के लिए गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन इलाके में बने शॉपिंग मॉल्स तक लाया जाता है। यूपी पुलिस के दजर्नों कमांडो साए की तरह उनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। विदेशी मेहमानों के साथ बैठे यूपी पुलिस के कमांडो उन्हें अपनी उत्सुकता भरी नजरों से निहारते हैं। कमांडो अपने मेहमानों के साथ बातचीत करना चाहते हैं लेकिन अंग्रेजी भाषा का ज्ञान न होना उनके इस अरमान को तार-तार कर देता है। वीरवार को पैसेफिक मॉल में शापिंग के लिए आए विदेशी मेहमानों की सुरक्षा में तैनात कमांडो सतीश, नरेश व अन्य जवानों ने बताया कि वे अपने मेहमानों के साथ बातचीत करना चाहते हैं। विदेशी मेहमानों की संस्कृति, खानपान एवं अन्य रीति रिवाजों के बारे में वे जानकारी लेना चाहते हैं लेकिन उनके वार्तालाप के बीच अंग्रेजी भाषा एक बड़ी अड़चन बन गई है। कमांडो का कहना है कि वे विदेशी मेहमानों से हाथ मिलाते हैं और उनके कुछ सवालों का जवाब हां या ना में देते हैं। यह दूसरी बात है कि विदेशी मेहमानों की भाषा उनके पल्ले पड़ती है या नहीं लेकिन वे अपनी मुस्कुराहट से उनका दिल जीतने की कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते। इसी तरह से विदेशी मेहमानों को सैर सपाटा कराने वाले डीटीसी बस के चालक मनोज कुमार ने बताया कि वे भी अपने मेहमानों से बातचीत करना चाहते हैं। अंग्रेजी का ज्ञान न होने के कारण वे विदेशी मेहमानों को केवल टाइम और उनके शैडय़ूल का अगला पड़ाव ही बता पाते हैं।

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दुभाषीय की भूमिका में यूनिवर्सिटी के छात्र

बस चालक मनोज कुमार एवं कमांडो का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के तीन-चार छात्र जो कि अंग्रेजी भाषा में माहिर हैं, वे बस में विदेशी मेहमानों के साथ सवार होते हैं। ये छात्र विदेशी मेहमानों और स्थानीय नागरिकों के बीच बातचीत कराने का अहम जरिया बनते हैं। खास बात है कि यह छात्र प्रतिदिन चार-पांच घंटे तक विदेशी मेहमानों के साथ रहते हैं, लेकिन इन्हें दुभाषीय बनने का कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता । छात्रों को इस बात की खुशी है कि उन्हें अपने देश के मान सम्मान को बढ़ाने के लिए विदेशी मेहमानों को उक्त सुविधा मुहैय्या कराने का मौका मिला है।

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  • Web Title:कॉमनवेल्थ के मेहमानों की सुरक्षा में तैनात यूपी पुलिस