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विश्व बैंक में विकासशील देशों का कोटा बढाने पर जोर

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की सालाना आम बैठक में भाग लेने यहां पहुंचे वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी एक बार फिर इन बहुराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों के लिये कोटा बढा़ने पर जोर देंगे।
   
मुखर्जी ने बुधवार को यहां कहा आईएमएफ में कोटा क्षेत्र में सुधार हमारा एक प्रमुख एजेंडा है। हम चाहते हैं कि आईएमएफ में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिये 5 से 6 प्रतिशत तक कोटा बढाया जाना चाहिये।  इन बहुराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों को उचित हिस्सा होना चाहिये।
   
उन्होंने कहा यह एक अहम मुददा है जो कि आईएमएफ और विश्व बैंक के शीर्ष अधिकारियों के साथ मेरी बातचीत में उठाया जायेगा।
   
इससे पहले ब्रसेल्स में हुई बैठक के घोषणापत्र के अनुसार अधिक प्रभावी वैश्विक आर्थिक संचालन के लिये इसमें कहा गया है कि आईएमएफ कोटा हिस्सा अधिक प्रतिनिधित्व वाले देशों से हटाकर कम प्रतिनिधित्व जिन देशों का है उनकी तरफ किया जाना चाहिये।  घोषणापत्र में कहा गया कि कम से कम पांच प्रतिशत कोटा गतिशील उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तरफ बढाया जाना चाहिये।

   
ब्रसेल्स में हुए एएसईएम के आठवें शिखर सम्मेलन में कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस लिये आलोचना की जाती है कि वह दूसरे विश्व युद्ध के विश्व शक्ति संतुलन को ही परिलक्षित करता है, उसी प्रकार आईएमएफ को भी इसलिये कोसा जाता है कि उसमें भी इसी तरह का आर्थिक संतुलन देखने को मिलता है।
   
मुखर्जी ने कहा कि आज विकासशील और उभरते देश विश्व अर्थव्यवस्था में व्यापक योगदान कर रहे हैं। हमारा कहना है कि आईएमएफ का संचालन ढांचा और कोटा वास्तविक स्थिति को परिलक्षित नहीं करते हैं।
   
उन्होंने आईएमएफ ढांचे में सुधार पर जोर देते हुये कहा कि आर्थिक क्षेत्र की वास्तविकतायें अंतर्राष्ट्रीय वित्त संस्थानों के कोटा, उसके संचालन ढांचे में दिखाई देना चाहिये।
  
डाउ जोन्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक जर्मन अधिकारी ने बर्लिन में मीडिया से कहा कि अगर अमेरिका तथा अन्य देश भी कदम उठाते हैं तो जर्मनी भी आईएमएफ बोर्ड में अपनी दो सीट छोड़ने को तैयार है।

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