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आतंकवाद के खिलाफ यूएन में हिन्दी में दहाड़े राजनाथ

आतंकवाद के खिलाफ यूएन में हिन्दी में दहाड़े राजनाथ

संयुक्त राष्ट्र में भारत के डेलीगेशन के सदस्य के रूप में पूर्व भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मुद्दे को बहुत ही मजबूती के साथ उठाया। उन्होंने अपना भाषण हिन्दी में पढ़ा।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद बहुत ही जघन्य और जहरीला अपराध है। भारत पिछले कई दशकों से आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है। उन्होंने 2008 के मुंबई हमलों का हवाला देते हुए कहा कि सीमापार से आने वाले आतंकी हमलों को कोई भी सरकार नहीं रोक सकती जबतक उसके लिए अंतर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रयास न किया जाय।

राजनाथ सिंह ने अपना भाषण हिन्दी में दिया और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि दुनिया की इतनी बड़ी आबादी की भाषा हिन्दी को शीघ्रातिशीघ्र संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाया जाए। उन्होंने महात्मा गांधी को याद किया और कहा कि सामाजिक चेतना का स्तर इतना ऊंचा कर दिया जाना चाहिए कि हिंसा का विरोध सामाजिक चेतना की एक विचारधारा के रूप में विकसित हो सके। उनका कहना था कि  अमेरिकी मानवाधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग ने इस लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी सफलता पायी थी।

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया की साझा कोशिशों को एक औपचारिक स्वरूप देने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज विश्व के सामने सबसे बड़ा ख़तरा बन कर खड़ा है। भारत इसका शिकार हो रहा है। अमेरिका सहित पूरी दुनिया के लोग इस खतरे को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन संयुक्त प्रयास की कमी है और इसी के चलते तरह-तरह के आतंकवादी संगठन मानवता और सभ्य समाज के सामने खतरा बन कर खड़े हो गए हैं।

सिंह ने कहा कि भारत के ऊपर 2008 में हुआ मुंबई हमला अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का सबसे खतरनाक उदाहरण है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि इस हमले में एक विदेशी सरकार का सहयोग  भी था। ऐसे प्रयास किये जाने चाहिए जिस से कोई भी देश आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा न बनाये। उनकी शिकायत थी कि भारत के पड़ोसी देश द्वारा आतंकवाद को राष्ट्रीय नीति बनाने का नुकसान अब पूरी दुनिया को उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र की अस्थायी कमेटी की अप्रैल में हुई बैठक में कुछ प्रगति हुई थी। कई देशों के प्रतिनिधियों ने पिछले महीने हुई संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में मसौदे को मंजूरी देने की इच्छा भी जतायी थी। इस सन्दर्भ में तुरंत कार्रवाई की जरूरत है क्योंकि बहुत वक़्त जाया हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह फौरन कार्रवाई करे और यह साफ सन्देश दिया जाय कि अब आतंकवाद के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

उन्होंने सभी प्रतिनिधिमंडलों से अपील कि कि इसी सत्र में सभी देशों को आम राय बनाकर आतंकवाद के खिलाफ लामबंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारों के स्तर पर तो आतंकवाद को ख़त्म करने की कोशिश होनी ही चाहिये, उसके खिलाफ सामाजिक आंदोलन भी शुरू किये जाने चाहिए जैसा कि महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग ने किया था।

गौरतलब है कि बहुत साल बाद संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी भाषा में जोरदार तरीके से भारत की बात को हिन्दी में कहा गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने करीब तीन दशक पहले विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी में ऐतिहासिक भाषण दिया था।

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