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ब्रिटिश आव्रजन सीमा नीति से नोबेल विजेताओं में रोष

ब्रिटेन के नोबेल पुरस्कार प्राप्त आठ वैज्ञानिकों ने देश की डेविड कैमरन सरकार द्वारा भारत एवं यूरोपीय देशों से बाहर के देशों के पेशेवरों के लिए लगाई गई आव्रजन संबंधी वार्षिक सीमा निर्धारित करने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से ब्रिटेन में विज्ञान एवं उद्योग क्षेत्र प्रतिभाओं से वंचित हो जाएगा।

वार्षिक सीमा लगाये जाने की नीति इस हफ्ते सुर्खियों में रही क्योंकि रूस में जन्मे मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिकों प्रोफेसर आंद्रे जिम और प्रोफेसर कोस्तांतिन नोवोसेलोव को भौतिकशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गयी।

जिम और नोवोसेलोव के अलावा ब्रिटेन में रहने वाले और तमिलनाडु में जन्मे वेंकटरमन रामकृष्णन को वर्ष 2009 का रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था।

दैनिक द टाइम्स को लिखे एक पत्र में आठों वैज्ञानिकों ने कहा कि कैमरन सरकार द्वारा लागू किए गये नए आव्रजन प्रतिबंधों के कारण विज्ञान एवं उद्योग क्षेत्र प्रतिभाओं से वंचित हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों को नियमों से उस तरह छूट नहीं दी जाती जिस तरह प्रीमियर लीग फुटबाल खिलाड़ियों को यह सुविधा दी जाती है।

सरकार ने अप्रैल 2011 तक गैर यूरोपीय संघ आव्रजकों की सीमा 24 हजार 100 तय की है। अप्रैल 2011 तक स्थायी सीमा लागू हो जाएगी।

गठबंधन सरकार के एजेंडा में गैर ईयू आव्रजकों की वार्षिक सीमा लागू करना एक प्रमुख मुद्दा है। जिम और नोवोसेलोव के अलावा पत्र पर सर पाल नर्स, सर टिम हंट, सर मार्टिन इवांस, सर हैरी क्रोटो, सर जान वाकर और सर जान सल्सटन के हस्ताक्षर हैं।

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