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राजसी वैभव एवं रंगीन जीवन शैली का प्रतीक: मारवाड़ फेस्टिवल

शरद पूर्णिमा के अवसर पर क्षेत्रीय लोक संगीत एवं लोक नृत्यों का दो दिनों तक चलने वाला भव्य फेस्टिवल है मारवाड़ फेस्टिवल। इसमें राजस्थान के शासकों की रंगीन जीवन शैली की तो झलक दिखती ही है, उनके राजसी वैभव की झलक भी देखने को मिलती है। शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में जब लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं तो लगता है मानो उस क्षेत्र की लोक कथाएं ही साकार हो उठी हैं। नृत्य तथा लोक संगीत में जहां सूफी संगीत की झलक देखने को मिलती हैं, वहीं लोक कथाओं पर आधारित गीत उस युग की याद दिला देते हैं।

यूं तो राजस्थान के विभिन्न क्षेत्र अपने-अपने लोक गीतों एवं लोक नृत्यों के लिए प्रसिद्ध हैं, परन्तु मारवाड़ के इस क्षेत्र की बात ही निराली है। यहां के प्रसिद्ध लोक कलाकारों द्वारा डांडिया का प्रदर्शन तथा लोक संगीत में प्रेम कथा का वर्णन हर सैलानी को भाव-विभोर कर देता है। लोक संगीत में प्रयुक्त होने वाले साज मोरचांग, नांद सारंगी, अलगौजा, खड़ताल, पूंगी आदि का प्रदर्शन देख हर सैलानी झूम उठता है। राजस्थान के भिन्न-भिन्न समुदाय के लोगों द्वारा किया जाने वाला प्रदर्शन विदेशी सैलानियों को खूब आकर्षित करता है।

थार रेगिस्तान के किनारे बसा जोधपुर राजस्थान का दूसरा बड़ा शहर है, जिसे राठौर राजा जोधा जी ने 15वीं शताब्दी में बसाया था। तभी से जोधपुर मुख्य व्यापारिक केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध रहा है। समारोहों में आने वाले सैलानी ओसिया के सैंड डय़ून्स पर लोक कलाकारों का प्रदर्शन तो देखते ही रह जाते हैं। यहां आप कैमल सफारी का आनंद लेना भी नहीं भूलेंगे।

यहां के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में 125 मीटर की ऊंचाई पर बना मेहरागढ़ का मुख्य किला, जिस में मोती महल, फूल महल, शीश महल, दौलतखाना तो दर्शनीय हैं ही, भारतीय राजवंशों के साज-सामान को संजोये है। अन्य दर्शनीय स्थलों में जसवंत थडा, उम्मेद भवन (जिस के एक हिस्से में होटल बन गया है), राजकीय संग्रहालय, मंडोर गार्डन आदि प्रसिद्ध है। यहां सफेद धातु की कलाकृतियां, चांदी के बर्तन, रजाई, बंधेज का कपड़ा, स्मृति चिन्हों को खरीदने में विदेशियों की खास रुचि रहती है।

कैसे पहुंचें

वायु मार्ग - दिल्ली, मुम्बई, उदयपुर से इंडियन एयरलाइंस तथा जैट एयर लाइंस की उड़ाने उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग - देश के मुख्य शहरों के साथ सीधी रेल सेवा उपलब्ध है।
सड़क मार्ग - राज्य के सड़क मार्ग द्वारा जोधपुर पहुंच सकते हैं। जयपुर से 336 किमी, उदयपुर से 260 किमी है। बीकानेर एवं दिल्ली से भी बस की सहायता से पहुंचा जा सकता है।
कहां ठहरें - ठहरने के लिए आरटी डीसी के होटल के अलावा, डीलक्स होटल, स्तरीय होटल तथा बजट होटल उपलब्ध हैं।

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