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टिकट पाने में दलबदलुओं की पूरी हो रही है आस

बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी छोड़कर इस बार पाला बदलने वालों की खूब चांदी है क्योंकि राजनीतिक दलों में भी अपनी महत्वाकांक्षाओं के पंख फड़फड़ाने की होड़ लगी हुई है।

दूसरी पार्टियों में सेंध लगाकर कई दल किसी भी प्रकार अधिक से अधिक सीटें जीतने की जुगत में लगे हैं। लालू प्रसाद के राजद के किले में इस बार सबसे अधिक सेंध लग रही है, जबकि कांग्रेस ने इस हिन्दी भाषी राज्य में अपना आधार मजबूत करने की चाहत के साथ दलबदलुओं के लिए दरवाजे खोल दिये हैं।

नब्बे के दशक में लालू प्रसाद की राजद की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के पतन की शुरूआत बिहार में हो गयी थी। राजद छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले कई दलबदलुओं को पार्टी ने इनाम में टिकट दिया है। पाला बदलने के लिए चर्चित नागमणि ने लोकसभा चुनाव 2009 में राजद के टिकट पर झारखंड की चतरा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और हार गये थे। लोकसभा चुनावों में उतरने से पहले नागमणि नीतीश सरकार में कृषि मंत्री थे और संसदीय क्षेत्र से टिकट के लिये राजद में शामिल हो गये थे।

अब विधानसभा में अपना टिकट सुनिश्चित करने के लिए अचानक ही उनकी निष्ठा कांग्रेस के प्रति जाग उठी और वह पार्टी की शरण में चले आये हैं। उनको समस्तीपुर जिले के मोरवा से टिकट मिला है, जबकि उनकी पत्नी और जदयू की निवर्तमान विधायक सुचित्रा सिंह भी कांग्रेस से ही प्रत्याशी बनने को इच्छुक हैं।

कांग्रेस को पूर्व सांसद और राजद के वर्तमान विधायक अनिल कुमार के पार्टी में शामिल होने से बल मिला है। कुमार को कांग्रेस ने गोपालगंज जिले के भोरे विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है।

राजद छोड़कर कांग्रेस में आये कई अन्य नेताओं को भी पार्टी ने टिकट दिये हैं। राजद के एक और वर्तमान विधायक बबलू देव को भी पार्टी में आने पर कांग्रेस ने पूर्वी चंपारण के मधुबन से टिकट दिया। देव ने हाल में राजद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के भाई रघुपति सिंह वैशाली जिले के महनार विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। जदयू सरकार में पूर्व मंत्री जमशेद अशरफ ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया है और उन्हें टिकट भी मिला है। कांग्रेस ने हरसिधी से संजय राम को टिकट दिया है जो जदयू सांसद पूर्णमासी राम के पुत्र हैं।

कांग्रेस दो बाहुबली नेताओं पप्पू यादव और आनंद मोहन की पत्नियों को भी अपने खेमे में लाने में सफल रही है। यादव की पत्नी और पूर्व सांसद रंजीता रंजन अब कांग्रेस नेता हैं। वहीं आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को कांग्रेस ने मधेपुरा के आलमनगर से टिकट दिया है। यादव और मोहन दोनों सजायाफ्ता हैं तथा जेल में बंद हैं।

कांग्रेस के मीडिया प्रकोष्ठ के प्रमुख प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस की लोकप्रियता और जनाधार बढ़ रहा है। इसलिए दूसरे दलों से अधिक से अधिक नेता हमारी पार्टी में आने का मन बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस को सत्तारूढ़ राजग और राजद लोजपा गठजोड़ के ठोस विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। वैसे टिकटों के बंटवारे के पहले जीत के पहलू पर समुचित तरीके से विचार किया गया।

जदयू के राजनीतिक किले में राजद ने भी सेंध लगायी है। सत्तारूढ़ दल की वरिष्ठ नेता वीणा शाही तथा रेयाजुल हक के अलावा प्रभुनाथ सिंह के पक्के समर्थक और जदयू के वर्तमान विधायक रामप्रवेश राय और केदारनाथ सिंह ने पाला बदलते हुए राजद की सदस्यता ग्रहण कर ली।

लालू प्रसाद की पार्टी ने भी दलबदलुओं के लिए पलक पांवड़े बिछाते हुए गोपालगंज के बरौली से मोहम्मद नेमातुल्लाह, पूर्णिया के आमौर से बाबर आजम और समस्तीपुर जिले के उजियारपुर से दुर्गा प्रसाद सिंह को टिकट दिया। तीनों नेताओं ने जदयू की प्राथमिक सदस्यता से हाल में इस्तीफा दिया था और राजद का दामन थाम लिया। इसी प्रकार लालू ने जदयू के वर्तमान सांसद मोनाजिर हसन की पत्नी शबनम परवीन को मुंगेर से प्रत्याशी बनाया है। इसी प्रकार जदयू भी दल बदलुओं को टिकट की रेवड़ी बांटने में पीछे नहीं है। सेंधमारी के इस खेल में यह भी पीछे नहीं रहा है।

सत्तारूढ़ दल ने राजद के वर्तमान विधायक राजेश सिंह को बाल्मीकिनगर, गिरधारी यादव को बेल्हर और श्रीकांत निराला को मनेर से टिकट दिया है। राजद की वर्तमान विधायक बीमा भारती को एपौली और रामलखन महतो को जदयू ने उजियारपुर से उम्मीदवार बनाया है। लोजपा के एकमात्र मुस्लिम विधायक इजहार अहमद को भी सत्तारूढ़ दल ने टिकट दिया है। अहमद दरभंगा जिले के गौराबौराम सीट से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। रामविलास पासवान की लोजपा से टिकट न मिलने से दुखी अहमद ने हाल में जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।

माकपा के पूर्व सांसद सुबोध राय पाला बदलकर जदयू में आ गये हैं और उन्हें भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से टिकट मिला है। पार्टी ने सरफराज आलम को भी अररिया जिले के जोकीहाट से अपना उम्मीदवार बनाया है। आलम पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के पुत्र हैं। तस्लीमुद्दीन ने हाल में राजद की सदस्यता छोड़कर नीतीश कुमार के नेतृत्व में आने का निर्णय किया था।

भाजपा में भी राजद और लोजपा से कई नेताओं का आना हुआ है। लोजपा के वर्तमान विधायक अच्युतानंद सिंह को भाजपा ने महनार से टिकट दिया है। लोजपा से भाजपा में आये एक और नेता रणगंगेश्वर सिंह भी प्रत्याशियों की सूची में अपना स्थान सुनिश्चित करने में सफल रहे हैं। वह समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर से पार्टी के उम्मीदवार हैं। बक्सर संसदीय क्षेत्र से राजद सांसद जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह को भाजपा ने रामगढ़ से टिकट दिया है। रामगढ़ राजद का एक मजबूत दुर्ग है।

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