DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चोटियां फतह करने निकले रिकार्ड पर्वतारोही

लेह में आपदा के कहर के चलते इस बार गंगोत्री घाटी में रिकार्डतोड़ पर्वतारोही पहुंच रहे हैं। मार्च से अब तक घाटी में 38 देशी-विदेशी दल विभिन्न चोटियों पर आरोहण को पहुंचे हैं।


उत्तराखंड बर्फीली चोटियों, बुग्यालों व प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थलों से घिरा हुआ है।
  राज्य में आरोहण की अनुमति के लिए खुली कुल 85 नामचीन पर्वत श्रृंखलाओं में दो दजर्न से अधिक चोटियां उत्तरकाशी की गंगोत्री घाटी में स्थित हैं। 5 हजार से लेकर साढ़े सात हजार मीटर ऊंची इन चोटियों पर आरोहण का न केवल भारतीय बल्कि विदेशी भी सपना संजोए रहते हैं। पिछले कुछ वर्षो में इन चोटियों पर विभिन्न कारणों के चलते अभियान दलों की संख्या में गिरावट देखी गई। किन्तु इस बार लेह में आपदा के कहर के चलते वहां से पर्वतारोहियों का मोहभंग हुआ है। गंगोत्री घाटी में जमकर हुई बर्फबारी के बाद यहां पर्वतारोहियों की रिकार्ड भीड़ जुटी है। भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के अधीन इन चोटियों पर आरोहण को इस बार 18 विदेशी व 20 भारतीय दल पहुंचे हैं। विदेशी दलों में ब्रिटेन, जर्मनी, आस्ट्रिया, फ्रांस, स्विटजरलैंड, स्लोविनिया, रूस, इटली, बांग्लादेश, कजाकिस्तान आदि देशों के दल शामिल हैं। ये दल वासुकी, शिवलिंग, भागीरथी, सतोपंथ, केदारडोम आरोहण को पहुंचे हैं। पीक क्लाइबिंग के लिए छोटा सा छोटा दल भी 2 से 10 लाख रुपये खर्च करता है, जबकि विदेशी दल का अभियान 30 से 50 लाख रुपये का होता है। इन अभियान दलों से स्थानीय लोगों को बतौर गाइड, पोर्टर, होटल, दुकान आदि से रोजगार मिला है।
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल आईएस थापा ने बताया कि यूरोपियन देशों की तर्ज पर यदि भारत में भी पर्वतारोहण को बढ़ावा मिला तो इससे रोजगार के साथ आर्थिकी में भी सुधार होगा। उन्होंने पर्यावरण के खिलाफ होने वाले अभियानों को अनुमति न देने का सुझाव देते हुए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की बात
कही है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:चोटियां फतह करने निकले रिकार्ड पर्वतारोही