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नौकरी से संतुष्टि

हममें से अधिकतर लोग मशीन की भांति काम कर रहे हैं। जीने के लिए काम करने की जगह लोग अपना जीवन नियमित काम करने में ही बिता देते हैं। हालांकि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी नौकरी और काम से बहुत खुश होते हैं, पर अधिकतर लोग न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने में ही अपना समय बिता देते हैं। 

नौकरी से संतुष्टि विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है। यह कारक भी समय और स्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। उसके बावजूद अपने काम से संतुष्ट होना भी बेहद जरूरी होता है। यही संतुष्टि लंबे समय तक अपने काम के साथ जोड़े रखने में मदद करती है। 

कार्य की प्रकृति: क्या आप ऐसा काम कर रहे हैं जो आप वास्तव में करना चाहते हैं? ऐसे लोग जो अपने काम से प्यार करते हैं, भले ही वे कितनी ही परेशानी में क्यों नहीं हो खुश दिखाई देते हैं। काम को सफलतापूर्वक पूरा करने में खुश होते हैं। यह जरूरी है कि जिस काम में आप अपना अधिकतम समय बिता रहे हैं, उस काम को पसंद करें।

नौकरी से संतुष्टि: संतुष्टि स्किल्स को अपडेट रखने की आपकी क्षमता पर भी निर्भर करता है। कल्पना कीजिए कि आप लंबे समय से बतौर तकनीकी लेखक कार्य कर रहे हैं और अचानक ही आपको विज्ञापन लेखन का काम दे दिया जाए। जाहिर है एक बार यह परिवर्तन असंतुष्टि उत्पन्न करेगा। यह भी संभव है कि आपको नया कार्य पसंद नहीं हो, उसके बावजूद आपको कई कार्य करने पड़ते हैं। बेहतर है कि अपनी स्किल्स और जानकारी को अपडेट रखें और हर तरह की जिम्मेदारी का सामना करने के लिए तैयार रहें।

तरक्की पसंद: विकास कई तरह का होता है। किसी के लिए विकास का अर्थ ज्यादा सूचना एकत्र करना और योग्यता में बढ़ोतरी करना होता है, तो किसी के लिए पद और वेतन में बढ़ोतरी। सबसे पहले अपनी जरूरत को समझना जरूरी होता है। उसी अनुसार खुद का अपडेट करें। यदि आपकी मंजिल स्पष्ट नहीं है तो कार्य से मिलने वाली संतुष्टि का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

मौद्रिक लाभ: हममें से अधिकतर सभी पैसा कमाने के लिए काम करते हैं। आर्थिक जरूरत लोगों को काम से लंबे समय तक जोड़े रखने में सहायक होती है। कुछ लोग काम से मिलने वाली संतुष्टि को समझ ही नहीं पाते। पैसा व नौकरी में संतुलन बनाना जरूरी है।

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