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22 देशों में दीर्घकालिक खाद्य संकट: संयुक्त राष्ट्र

22 देशों में दीर्घकालिक खाद्य संकट: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को कहा कि दुनिया के 22 देशों में प्राकृतिक आपदाओं, संघर्ष और कमजोर प्रबंधन के चलते दीर्घकालिक खाद्य संकट की स्थिति है।

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) की संयुक्त रिपोर्ट ‘विश्व में खाद्य असुरक्षा की स्थिति’ में ये निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए हैं। पिछले महीने एफएओ ने कहा था कि विश्व में भूखे लोगों की संख्या वर्ष 2009 में दर्ज की गई 1.02 अरब लोगों की संख्या से घटकर 92.5 करोड़ हो गई है।

एफएओ ने कहा कि भूखे लोगों की संख्या में यह कमी वर्ष 2010 में आर्थिक हालात में सुधार के चलते हुई है और वर्ष 2008 के मध्य के उच्च खाद्यान्न कीमतों के कम होने के कारण आई है। संगठन ने कहा कि हालांकि यह संख्या अभी भी काफी ज्यादा है। दुनिया में हर छह सेकेंड में भूख से संबंधित बीमारियों के कारण एक बच्चों की मौत होती है।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दीर्घकालिक खाद्य संकट झेल रहे देशों में कुपोषित लोगों की संख्या अन्य विकासशील देशों की तुलना में ज्यादा है। अफगानिस्तान, अंगोला, बुरुंडी, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, चाड, कांगो, इवोरी कोस्ट, उत्तर कोरिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इरीट्रिया, इथोपिया, गुयाना, हैती, इराक, केन्या, लाइबेरिया, सीरिया लियोन, सोमालिया, सूडान, ताजिकिस्तान, युगांडा और जिम्बाम्बे संयुक्त राष्ट्र के 22 देशों की सूची में शामिल हैं।

संगठन के मुताबिक जरूरत की 10 प्रतिशत विदेशी सहायता मिलने पर भी दीर्घकालिक खाद्य संकट वाले इन देशों में खाद्यान्नों की कमी अगले आठ साल तक बनी रह सकती है। संयुक्त राष्ट्र के दोनों संगठनों में अपने बयान में कहा, ‘संकट से ग्रस्त इन देशों को दी जा रही मदद की मात्रा पर दोबारा विचार की जरूरत है।’

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