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डीजीपी अपना प्रशासन सुधारें

बोकारो के एक शिक्षक को जेई बनाने के मामले में हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश नहीं करने पर कोर्ट ने डीजीपी नेयाज अहमद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए छह अक्तूबर को कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस भगवती प्रसाद की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने डीजीपी से कहा- आप अपना प्रशासन सुधारें।

अक्षम अफसरों के बदलें, सक्षम की मांग करें। अवमानना की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रारंभिक रिपोर्ट दी गई है, लेकिन इसमें न तो किसी की गवाही है और न ही बयान ही दर्ज किए हैं। ऐसे असक्षम जांच अधिकारी की क्या जरूरत है। अफसरों को दुरुस्त करें। कोर्ट ने आठ अक्तूबर को मामले की सुनवाई निर्धारित करते हुए डीजीपी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस दिन भी डीजीपी को कोर्ट में हाजिर रहने को कहा गया।

मामला बोकारो जिले का है। स्कूल भवन निर्माण के लिए एक सहायक शिक्षक को जेई (कनीय अभियंता) बनाया गया था। उसे तीन वित्तीय वर्ष में 21 करोड़ रुपए एडवांस दिया गया था। इस शिक्षक ने पूरी राशि खर्च ही नहीं की और भवन का निर्माण भी समय पर नहीं हुआ।

शिक्षक को जेई बनाने के खिलाफ युवा शक्ति मंच ने जनहित याचिका दायर की। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निगरानी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। आदेश के एक साल बीत जाने के बाद भी निगरानी ने अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। छह अक्तूबर को करीब एक हजार पन्ने की रिपोर्ट सौंपी गई। लेकिन इसमें कोई तथ्य नहीं था। पूर्व में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने डीजीपी को तलब किया था।

21 करोड़ एडवांस मिले थे
वित्तीय वर्ष 2003-04, 04-05 एवं 05-06 में सहायक शिक्षक अशोक भारती को स्कूल भवनों के निर्माण के लिए कनीय अभियंता बनाते हुए 21 करोड़ रुपये एडवांस दिए गए। डीएसइ की ओर से बताया गया है कि चूंकि इसमें से सिर्फ नौ करोड़ रुपये ही खर्च हुए थे। इस कारण भारती को पुन: काम देकर शेष 12 करोड़ एडजस्ट करने का प्रयास किया गया।

कस्तूरबा गांधी स्कूल के निर्माण के लिए दी गई राशि में 70 लाख रुपये अभी तक एडजस्ट नहीं हुए। इसी प्रकार पांच हाइ स्कूलों के निर्माण के लिए दी गई राशि में से करीब 50 हजार रुपये अभी भी एडजस्ट नहीं किया जा सका है।

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