अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मंदिर-मस्जिद का हल बातचीत से निकालने की कोशिश जारी

मंदिर-मस्जिद का हल बातचीत से निकालने की कोशिश जारी

अयोध्या की विवादित जमीन पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के आए फैसले को चुनौती देने के लिए सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के उच्चतम न्यायालय में जाने के कल के निर्णय के बावजूद बातचीत से इस मसले के हल की कोशिश लगातार जारी है और इसी क्रम में आज प्रमुख मुस्लिम पक्षकार मोहम्मद हाशिम अंसारी ने फिर साधु सन्तों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त ज्ञानदास से बातचीत की।

इस विवाद का सुलह समझौते से हल करने के लिए सुबह करीब साढ़े आठ बजे 90 वर्षीय अंसारी ने ज्ञानदास के हनुमानगढ़ी स्थित आवास पर करीब एक घन्टे तक बंद कमरे में बातचीत की। अंसारी के अनुसार बातचीत काफी सार्थक रही। दास ने उनसे कहा कि निर्मोही अखाड़े से अखाड़ा परिषद बातचीत कर रहा है। उनसे आपसी सहमति बन जाने पर मुस्लिम धर्म गुरुओं से बात की जाएगी।

अयोध्या के ही हाजी महबूब, बाबू खान और बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमेटी के संयोजक और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी से सख्त नाराज अंसारी ने कहा कि यदि इन लोगों को लगता है कि महंत ज्ञानदास से बात नहीं की जानी चाहिए तो यही बताएं कि बात आखिर हो किससे।

उन्होंने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फरूकी के इस बयान को झूठ करार दिया कि बोर्ड ने किसी को भी पक्षकारों से बातचीत के लिए अधिकृत नहीं किया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड यदि ऐसे फैसले लेता रहा तो वह बाबरी मस्जिद के बारे में अदालत में पैरवी करना बंद कर देंगे। अंसारी ने कहा कि बोर्ड के कहने पर ही उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महंत ज्ञानदास से बात शुरू की थी।

आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष मनिन्दर जीत सिंह बिट्टा ने भी हाशिम से मुलाकात की और बातचीत से इस मसले के हल के उनके प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि श्री हाशिम इसका हल निकालने का प्रयास कर रहे हैं तो उनकी मदद की जानी चाहिए।

अंसारी ने कहा कि वह यहीं पैदा हुए और यहीं जीवन के अन्तिम पड़ाव पर पहुंच रहे हैं। उनकी चाहत है कि मामला उनके जीवन में ही सुलझ जाए और आने वाली पीढ़ी का इसका दंश न झेलना पड़े। इस मुद्दे पर राजनीति बहुत हो चुकी अब समझौता होना चाहिए।

इस बीच उन्हें कथित रूप से जान से मारने की मिली धमकी के मद्देनजर अंसारी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके आवास पर पीएसी लगा दी गई है। उनके साथ चार सुरक्षाकर्मी अलग से चल रहे हैं।

दूसरी ओर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ से विवादित धर्मस्थल को लेकर आए फैसले में सर्वाधिक फायदे में माने जा रहे रामलला विराजमान स्थल के निकटस्थ मित्र के रूप में पक्षकार रहे त्रिलोकी नाथ पाण्डेय ने कहा कि राम के भव्य मंदिर के लिए पूरी विवादित जमीन चाहिए। उन्होंने कहा कि राम का मंदिर भव्य बनेगा और इसके लिए विवादित स्थल के एक तिहाई के बजाय काफी जमीन की आवश्यकता पड़ेगी।

न्यायालय के आदेश के अनुसार करीब चालीस हजार तीन सौ इकसठ वर्ग फुट मात्र जमीन रामलला के हिस्से में आ रही है। इतने में तो मंदिर की पार्किंग भी नहीं बन पाएगी। न्यायालय ने विवादित स्थल 2.77 एकड़ को तीन भागों में विभाजित कर एक हिस्सा रामलला विराजमान स्थल दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को दिया है।

पाण्डेय ने कहा कि भव्य मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए कांचीकामकोटि के शंकराचार्य जएन्द्र सरस्वती का उनके पास फोन आया था। शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द ने भी अपनी शुभकामनाएं दी हैं लेकिन इस मामले में अन्तिम फैसला विहिप के केन्द्रीय पदाधिकारी लेंगे। हालांकि उन्होंने इस बारे में खुलकर नहीं बताया और इतना ही कहा कि उनके यहां फैसले संगठन लेता है।

पाण्डेय ने बताया कि निर्मोही अखाड़े से बातचीत चल रही है। दोनों ही मंदिर निर्माण मिलजुल कर करने को तैयार हैं। छोटी छोटी बाधाएं हैं उन्हें मिल बैठकर तय कर लिया जाएगा।
 उन्होंने बताया कि निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास उनसे मिलने आए थे। मामले के एक अन्य पक्षकार धर्मदास से भी उनकी बात हुई है। सभी भव्य राम मंदिर निर्माण के पक्षधर हैं। सबका कहना है कि यह दुनिया के खूबसूरत मंदिरों में से एक होना चाहिए।

सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के उच्चतम न्यायालय में जाने के निर्णय से पाण्डेय जरा भी विचलित नजर नहीं आए। उनका कहना था कि उच्च न्यायालय ने राम जन्मभूमि की प्रमाणिकता सिद्ध कर दी है। उससे अब कोई इन्कार नहीं कर सकता और जब विवादित स्थल राम जन्मभूमि है तो उस पर मंदिर निर्माण कौन रोक सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मंदिर-मस्जिद का हल बातचीत से निकालने की कोशिश जारी