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राष्ट्रमंडल खेल के कारण चीकू की मांग बढ़ी, किसान उत्साहित

नई दिल्ली में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल हिमाचल प्रदेश के चीकू उत्पादकों के लिए फायदेमंद साबित हुए हैं, क्योंकि विदेशी मेहमानों के बीच इस फल की मांग काफी बढ़ गई है।

दिल्ली स्थित आजादपुर थोक फल मंडी के फल व्यावसायी नरेश डोगरा ने बताया, ''दिल्ली में इन फलों की मांग बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश के चीकू उत्पादकों को इन फलों की आपूर्ति भारी मात्रा में करने के लिए कहा गया है।''

उन्होंने बताया कि ज्यादा से ज्यादा चीकू खेल गांव की तरफ भेजे जा रहे हैं। डोगरा ने बताया कि इस फल का खुदरा भाव 250 से लेकर 300 रुपये प्रति किलो है।

हिमाचल प्रदेश के मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के सोलन, शिमला, सिरमौर, मंडी और कुल्लू जिलों को चीकू की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

बागवानी विभाग का अनुमान है कि कुल्लू घाटी में कम से कम 200 किसानों ने केवल चीकू फल की खेती की है। राज्य में पिछले साल इसका उत्पादन 154 टन था, जबकि इस वर्ष मौसम अनुकूल होने के कारण इसके उत्पादन में 50 प्रतिशत की और वृद्धि होने की उम्मीद है।

कुल्लू के समीप चीकू फल की खेती करने वाले राजीव बेग्टा ने बताया, ''फलों की मांग आपूर्ति से अधिक है। इस बार फल का उत्पादन प्रचुर मात्रा में हुआ है। इस वर्ष किसान प्रतिदिन 300 से 400 चीकू की पेटियां दिल्ली भेज रहे हैं। पिछले साल यह संख्या प्रतिदिन 150 से 200 के बीच थी।''

उन्होंने बताया कि एजेंट इस फल के कारोबार में लाभ देखते हुए कुल्लू पहुंच गए हैं और फल उत्पादकों से खरीददारी कर रहे हैं। कुल्लू के थोक फल बाजार में बुधवार को चीकू की कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलो थी। जबकि पिछले साल इसे 60-100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा गया था।

उधर, बागवानी विभाग के सहायक योजना अधिकारी सुधीर कतिहा ने बताया कि राज्य में चीकू फल की खेती जोर पकड़ रही है।

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