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बिल्ली रानी बड़ी सयानी

बिल्ली रानी बड़ी सयानी

बच्चो, बिल्ली मौंसी और उससे जुड़ी कहानियां तुम लोग बचपन से सुनते आए होगे। आमतौर पर तुम लोगों ने काली-भूरी बिल्लियां देखी होंगी, जो तुम्हारे घर के आसपास रहती हैं। आज तुम्हें विश्व में पायी जाने वाली कई अन्य तरह की बिल्लियों के रंग के बारे में और उससे जुड़ी कुछ बातें बताते हैं।

एकदम काली बिल्ली सामान्यत: कम ही मिलती है। ज्यादातर काली बिल्लियों के शरीर में सफेद धब्बे रहते हैं। धब्बे उनकी ठोढ़ी या फिर चेहरे पर होते हैं। मध्यकाल में बिल्लियों को शैतान समझे जाने के कारण काली बिल्ली को बिल्कुल नकारा गया। इस तरह की भ्रांतियों के चलते लोग एकदम काली बिल्ली के बजाय सफेद चकत्ते वाली बिल्ली को पसंद करने लगे। धीरे-धीरे एकदम सफेद या फिर सफेद धारियों वाली बिल्ली को पालने का प्रचलन बढ़ गया। सफेद निशान को लोग शराफत का चिह्न् या देवदूत की निशानी मानने लगे। परिणामत: काली बिल्ली का अस्तित्व कम हो गया और सफेद चकत्ते वाली बिल्ली का अस्तित्व बरकरार रहा।

बच्चो, तुम्हें रंग-बिरंगी धारियों वाली बिल्लियां पसंद होंगी। चीते की तरह लगने वाली ये बिल्लियां या तो चकत्ते वाली होती हैं या धारी वाली। काली-सफेद और विभिन्न रंगों वाली बिल्ली को अमेरिका में ‘कैलिको’ कहते हैं।

बच्चो क्या तुम जानते हो, कुछ बिल्लियों का रंग अदरक जैसा भी होता है। कुछ बिल्लियां दोरंगी होती हैं। जैसे सफेद व क्रीम, सफेद व नारंगी, सफेद व नीली और सफेद या काली। कुछ बिल्लियां एकदम सफेद भी होती हैं। इनमें से कुछ के शरीर के निचले हिस्से में अनियमित चकत्ते होते हैं। सफेद बिल्लियों की सामान्यत: नीली, नारंगी या पीली आंखें होती हैं। नीली आंखों वाली सफेद बिल्ली ढीठ होती हैं।

बिल्ली से इंसान का रिश्ता

बिल्ली और मनुष्य का साथ 4000 साल पुराना है। प्राचीन मिस्र में तो बिल्ली को देवता मानकर उसकी पूजा की जाती थी। पूर्वी इलाकों में भी बिल्ली को इस बात का श्रेय दिया जाता था कि वह नुकसानदायक जीवों को खत्म करने वाली है।  यूरोप में ईसाई धर्म के प्रादुर्भाव के समय बिल्ली के संबंध में कुछ लोगों की सोच में खतरनाक ढंग से परिवर्तन आया। इसके बाद करीब 500 साल तक बिल्ली को शैतान का दूत समझा गया। बिल्ली को चुड़ैल परिवार का सदस्य समझ उससे नफरत की जाने लगी। इससे भी ज्यादा खतरनाक स्थिति तब आई, जब अक्सर किसी समारोह में चुड़ैल के किसी रूप और बिल्ली को सार्वजनिक तौर पर जलाया जाने लगा।

सौभाग्य से 17वीं सदी में संपन्नता और जागरूकता एक साथ आई। लोगों ने बिल्ली को फिर से अपनाना शुरू किया। यही नहीं, बिल्ली की सुंदरता और उसकी महत्ता को कला व साहित्य में उभारा गया। महारानी विक्टोरिया के समय में बिल्ली पालतू जानवरों में लोकप्रिय हो गई।

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