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रईसों का खेल है पोलो

रईसों का खेल है पोलो

बच्चो, तुम लोग यह बात तो जानते होगे कि पोलो एक महंगा खेल है, इसलिए इसे रईसों का खेल माना जाता है। लेकिन क्या यह भी जानते हो कि विश्व का सबसे पुराना खेल भी यही है। पहले इसे राजा-महाराजाओं का खेल कहा जाता था, जिसका नाम चौगान था। इस खेल का बल्ला हाकी की तरह होता है, जिसे मैलेट कहा जाता है। यह खेल कब और कैसे शुरू हुआ आओ तुम्हें बताते हैं।

इस खेल की शुरुआत पहली शताब्दी में ईरान में हुई। पुराने प्रमाण बताते हैं कि यह खेल ईरान से अरबिया पहुंचा और इसके बाद तिब्बत में इसकी शुरुआत हुई। तिब्बत में इस खेल को ‘पुलू’ नाम से जाना जाता था। पोलो शब्द की उत्पत्ति ‘पुलू’ शब्द से हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है गेंद। इंडिया में इस खेल की शुरुआत 13वीं शताब्दी में मुगल बादशाओं ने की। मुगल राजाओं के समय दिल्ली और आगरा में चौगान की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती थीं। बच्चो, तुम जानते हो कि बाबर को पोलो खेल पहुत पसंद था। इसके अलावा नूरजहां, ईरान के सुल्तान कुसरो की पत्नी और शहजादी को भी यह बेहद प्रिय था। क्या तुम जानते हो कि कुतुबुद्दीन ऐबक, जिन्होंने कुतुबमीनार बनवाई थी, उनकी मौत भी पोलो खेलते समय घोड़े से गिरकर हुई थी। सन 1860 में यह खेल इंग्लैंड पहुंचा। आजकल यह खेल तमाम देशों में पूरे जोश के साथ खेला जाता है और टूर्नामेंट होते हैं, जिसमें बड़ी बड़ी हस्तियां शामिल होती हैं। सन 1859 में आधुनिक प्रकार के पोलो का क्लब काचर क्लब असम में स्थापित किया गया था। पोलो की सबसे बड़ी ट्राफी बेंगलुरू हैंडीकेप पोलो टूर्नामेंट ट्रॉफी है। इस ट्रॉफी की लंबाई 6 फीट है। इसे कोलान्का के राजा ने भेंट किया था।

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