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तय होना है कि मासिक अभिदान में वृद्धि

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन से हेल्थ स्कीम के लिए अभी पुरानी दर पर ही मासिक अभिदान की कटौती होगी। कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने नई दर पर रोक लगा दी है। इसकी दो वजह है। अव्वल तो यह कि केंद्र सरकार के जिस आदेश के आधार पर मासिक अभिदान की राशि में इजाफा किया गया है उसे कार्य परिषद के संज्ञान में नहीं लाया गया है, दूसरा यह है कि कर्मचारियों को हेल्थ स्कीम का आंशिक लाभ जनवरी 2010 और पूर्ण लाभ जुलाई 2010 से मिला है जबकि मासिक अभिदान जून 2009 से बढ़ाने का आदेश किया गया है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय सेंट्रल हेल्थ स्कीम (एयूसीएचएस) को अक्टूबर 2006 में कार्य परिषद ने मंजूरी दी थी।  इसके बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन से इस मद में प्रतिमाह 50 से लेकर 150 रुपये तक की कटौती की जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रलय की ओर से जारी आदेश का हवाला देते हुए रजिस्ट्रार जेएन मिश्र ने पिछले दिनों जून 2009 से मासिक अभिदान की कटौती में वृद्धि का आदेश जारी किया था। कहा गया था कि कर्मचारियों के वेतन से जून 2009 से अब तक के 14 महीने की बढ़ी हुई रकम काटी जाएगी। कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। इस कारण इविवि प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। डिप्टी रजिस्ट्रार एवं मेडिकल सेल के प्रभारी आरएल विश्वकर्मा का कहना है कि कर्मचारियों का तर्क है कि अलोपो के जरिए हेल्थ स्कीम का आंशिक लाभ जनवरी और पूर्ण लाभ जुलाई से दिया गया है। अभी यह तय होना है कि बढ़ी हुई दर पर कटौती जनवरी से हो या जुलाई से। वित्तीय मामला है और इस बारे में केंद्र सरकार के स्पष्ट आदेश हैं इसलिए निर्णय कुलपति के स्तर से ही संभव है। उन्होंने बताया कि निर्णय नहीं हो सका है इसलिए फिलहाल पुरानी दर पर ही कटौती की जा रही है।

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