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तीन साल मजे ले लो

मौलाना लपके चले आ रहे थे। हाथ में एक पैकिट था। बोले- ‘लो मियां, आपके लिए। दामाद दुबई से कई शर्ट पीस लाया है। सबसे बढ़िया पीस बेगम ने आपके तईं भिजवाया है। मैं जानता हूं कि पितृपक्ष चल रहा है। नया कुछ खरीदना मना है। मगर यह तो गिफ्ट है। यों भी रिवाज कुरान और पुराण में नहीं लिखे रहते। वक्त, जरूरत और इंसानी मोहब्बत के साथ बदलते रहते हैं।’ मौलाना और भाभी के अपनेपन से दिल का कागज नम हो गया।
मुंह में इकट्ठे दो पान ठूंस कर बोले- ‘यार, वक्त पूरी स्पीड से बदल रहा है। हम आप तो समय के शोकेस में पुराने म्यूजियम पीस होकर रह गए हैं। अब यही देखा। न्यूज जारी की गई है कि बस तीन साल दूर है तबाही। ब्रिटिश रक्षामंत्री लियेन फाक्स ने बोला है कि सन् 2013 में सूरज से ऐसी विशाल चमक निकलने की आशंका है कि पृथ्वी झुलस जाएगी। बोले हैं कि सूरज हर 100 साल पर ऐसा विकराल रूप धारण करता है।’
घबराहट में पीक निगलते हुए मौलाना बोले- ‘लो, भाई मियां, गिन लो दिन। अगर लंदन से यह बेपर की उड़ी है तब तो उड़ने दो। और अगर, खुदा-न-खास्ता, यह सच है तो रहे नाम अल्लाह का। न मंदिर, न मस्जिद, न कोर्ट कचहरी समूची भैंस गई पानी में। तीन साल और पंख फड़फड़ा लो। सारा भ्रष्टाचार, महंगाई, दंद-फंद, आतंक निपटा लो.. फिर तो राख होना ही है। अल्ला करे ऐसा न हो और पृथ्वी जैसी तैसी चलती रहे। भूल कर भी यह खबर मेरी बेगम को न बताना, वरना नानस्टाप रोती रहेगी। शायद भी कह गया है- मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं.. जिन्दगी भी जान लेकर जाएगी। ..खुदा हाफिज। मीट यू फार थ्री इयर्स मोर।’  

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  • Web Title:तीन साल मजे ले लो