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एथलेटिक्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने उतरेगा भारत

एथलेटिक्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने उतरेगा भारत

उसैन बोल्ट जैसे स्टार एथलीटों की अनुपस्थिति में राष्ट्रमंडल खेलों की ट्रैक एवं फील्ड प्रतियोगिता की चमक भले ही कुछ फीकी पड़ गई हो लेकिन फिर भी इसमें कई रोचक मुकाबले देखने को मिलेंगे और जहां तक भारत की बात है तो वह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने कोशिश करेगा।

ट्रैक एवं फील्ड प्रतियोगिताएं बुधवार से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में शुरू होगी जिसमें महिलाओं की भाला फेंक और पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ के अलावा परास्पोटर्स में महिलाओं की गोला फेंक के स्वर्ण पदक का भी फैसला होगा। बुधवार को होने वाली अन्य स्पर्धाओं में महिला और पुरुष वर्ग की हीट्स, महिलाओं की 400 मीटर की हीट्स, पुरुषों के गोला फेंक का शुरुआती दौर और परा स्पोटर्स में महिलाओं की 100 मीटर रेस शामिल है।

भारत ने अब ट्रैक एवं फील्ड में केवल नौ पदक जीते हैं जिसमें उड़न सिख मिल्खा सिंह का 1958 में वेल्स के कार्डिफ में 440 गज की दौड़ में स्वर्ण पदक भी शामिल है। भारत ने वैसे इस बार 110 सदस्यीय दल उतारा है जिसमें 52 महिलाएं शामिल है। भारत को कम से कम छह पदक की आस है।

भारत ने मेलबर्न 2006 में दो रजत पदक जीते थे। उसे ये पदक महिलाओं की चक्का फेंक में सीमा एंतिल ने और महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर रिले टीम ने दिलाए थे। भारतीय एथलेटिक महासंघ के ललित भनोट ने कहा कि इस बार हमारे पास राष्ट्रमंडल खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का मौका है। मुकाबला काफी कड़ा है क्योंकि जमैका, कीनिया, ग्रेट ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका भी भाग ले रहे हैं।
 
पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में भारत ने नौ एथलीट उतारे हैं जिनकी अगुवाई अब्दुल नाजिब कुरैशी करेंगे जबकि महिला फर्राटा दौड़ में देश की आठ धाविकाएं ट्रैक पर उतरेंगी और इनकी अगुवाई एस गीता और एचएम ज्योति करेंगी। इन सबके लिए हालांकि सेमीफाइनल में जगह बनाना आसान नहीं होगा क्योंकि कुछ खिलाड़ियों के नाम वापस लेने के बावजूद कई चोटी के एथलीट यहां पहुंचे हुए हैं।

बोल्ट, असाफा पावेल, फिलिप इडोउ जैसे एथलीटों के नहीं आने के बावजूद महिला और पुरुष दोनों वर्ग में राष्ट्रमंडल खेलों के 60 चैंपियन भाग ले रहे हैं। यदि फर्राटा दौड़ की बात करें तो बोल्ट और पावेल की अनुपस्थिति में इंग्लैंड के मार्क लुईस फ्रांसिस और जमैका के ओसेन बैली को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। अफ्रीकी देशों का 5000 मीटर में दबदबा रहना तय है।

कीनिया के पूर्व विश्व चैंपियन इलिड किपचोगे और मार्क किपटू को इस दौड़ में स्वर्ण पदक के दावेदार हैं। भारत ने 5000 मीटर दौड़ में सुनील सिंह और संदीप बाथम को उतारा है। दक्षिण अफ्रीका की पिछली चैंपियन सुनेट विजियोन को भाला फेंक में फिर से मजबूत दावेदार माना जा रहा है। उन्होंने इस साल 66.38 मीटर भाला फेंका था। आस्ट्रेलिया की किम्बरले मिकल और इंग्लैंड की लारा विटिनगम ने भी इस साल 60 मीटर से अधिक की दूरी नापी है। भारत की तरफ से इस स्पर्धा में केवल एस सरस्वती भाग लेंगी।

महिला फर्राटा दौड़ में दुनिया की चोटी की चार एथलीट राष्ट्रमंडल देशों से हैं लेकिन इनमें से कोई भी दिल्ली नहीं आया। उनकी अनुपस्थिति में बीजिंग ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता नाईजीरियाई ब्लेसिंग ओकैगबारे और इंग्लैंड की लारा टर्नर में स्वर्ण पदक के लिए मुख्य मुकाबला होगा।

भारत को महिला चक्का फेंक में पदक की आस है जिसमें कृष्णा पूनिया, राष्ट्रीय रिकार्डधारक और मेलबर्न खेलों की रजत पदक विजेता सीमा एंतिल और हरवंत कौर भाग ले रही हैं। महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में पीटी ऊषा की शिष्या टिंटु लुका से देश को पदक की आशा है। लुंका ने अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार किया है और हाल में कंटिनेंटल कप में में वह एक मिनट 59.19 सेकेंड का प्रभावशाली समय निकालने में सफल रही थी। बीजिंग ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता कीनियाई नैन्सी जेबेट लागेट और दक्षिण अफ्रीका की विश्व चैंपियन कास्टर सेमेन्या के हट जाने के बाद लुका के पास पदक जीतने का अच्छा मौका रहेगा।

महिलाओं की लंबी कूद और त्रिकूद में मयूखा जानी से पदक की आस की जा सकती है। उन्होंने अगस्त में राष्ट्रीय अंतरराज्य मीट में त्रिकूद में 13.67 मीटर की दूरी नापकर अंजू बाबी जार्ज के 2002 में बनाए गए राष्ट्रीय रिकार्ड को तोड़ा था। भारत को इसके अलावा महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर दौड़, पुरुषों की चक्का फेंक, गोला फेंक और भाला फेंक में भी पदक की आस है।

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