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कोष जुटाने के मामले में रिकार्ड बना सकती है घरेलू कंपनियां

घरेलू शेयर बाजार के रिकार्ड स्तर पर पहुंचने के साथ ही उत्साह का माहौल प्राथमिक बाजार में भी देखने को मिल रहा है। ऐसे में वर्ष 2010 को घरेलू कंपनियों ने आईपीओ, राइट इश्यू के जरिये रिकार्ड कोष जुटाने के रिकार्ड के रूप में याद किया जा सकता है।
   
ब्रोकरेज कंपनी मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चालू वर्ष में अबतक भारतीय कंपनियों ने घरेलू बाजार में निर्गम के जरिये 50,000 करोड़ रुपये जुटाये हैं। यह 2007 के रिकार्ड से थोड़ा ही कम है जब घरेलू कंपनियों ने 52,900 करोड़ रुपये जुटाये थे।
   
ब्रोकरेज हाउस ने कहा कि चालू वर्ष 2010 की चौथी तिमाही में सार्वजनिक और निजी कंपनियों के कोष जुटाने के प्रस्ताव को देखते हुए कहा जा सकता है कि पूंजी जुटाने के मामले में यह साल 2007 को पीछे छोड़ सकता है।

आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को मिले समर्थन से भी निवेशकों में उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है। उदाहरणस्वरूप केवल सितंबर महीने में सार्वजनिक निर्गम को औसतन 11 गुना अभिदान मिला। कुल 3,400 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिये निवेशकों की ओर से 37,000 करोड़ रुपये की मांग आयी।
  
पिछले महीने, इरोज इंटरनेशनल मीडिया का 350 करोड़ रुपये के आईपीओ को 27 गुना अभिदान मिला। वहीं टेकप्रो सिस्टम्ज के 268 करोड़ रुपये के आईपीओ को 24 गुना अभिदान मिला। इसी प्रकार, माइक्रोसेक फिनांशल का 147. 5 करोड़ रुपये के निर्गम को 12 गुना अधिक अभिदान मिला।


सरकार का लगभग 10 अरब डॉलर का निवेश कार्यक्रम और रीयल एस्टेट, तथा बुनियादी ढांचा जैसी परियोजनाओं के लिये निजी क्षेत्र की कोष जुटाने की जरूरत को देखते हुए आने वाले दिनों में और नये निर्गम आने की संभावना है।
   
सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लि़ का आईपीओ इस महीने के अंत में आ रहा है। इसके जरिये सरकार को 16,000 करोड़ एपये जुटाने की संभावना है। यह अबतक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पहले रिलायंस पावर का 11,500 करोड़ एपये का आईपीओ सबसे बड़ा था।
   
रिपोर्ट में कहा गया है, भारतीय बाजार में इस समय तेजी का दौर है। इसका सबूत प्रमुख सूचकांकों में तेजी, विदेशी संस्थागत निवेशकों में वृद्धि, आईपीओ को ज्यादा अभिदान, कारोबार मात्रा में वृद्धि है।

पिछले महीने महीने, एनएई निफ्टी 6,000 अंक को पार कर गया जबकि सेंसेक्स 20,000 के स्तर को लांघ गया। इससे पहले जवरी 2008 में यह स्तर देखा गया था।
  
घरेलू बाजार में तेजी का प्रमुख कारण एफआईआई की ओर से होना वाला बड़े पैमाने पर निवेश है। अबतक 2010 में एफआईआई 20 अरब डॉलर रहा है जो अब तक का रिकार्ड है।

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