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उद्योग का स्थानीयकरण करते हैं अधिक फैशन सप्ताह

देश के अग्रणी डिजाइनरों में से एक सुनीत वर्मा फैशन सप्ताह के बढ़ते आयोजनों से खुश नहीं हैं। वर्मा मानते हैं कि इससे न केवल व्यापार प्रभावित होता है बल्कि उद्योग के एकीकृत होने की बजाए उसका स्थानीयकरण होता है।

वर्मा ने एक साक्षात्कार में कहा, ''आदर्श रूप में किसी भी देश में दो से ज्यादा फैशन सप्ताहों का आयोजन नहीं होना चाहिए और अमेरिका जैसे पश्चिम देशों में ऐसा ही होता है। वहां दो फैशन सप्ताह और एक फैशन प्रदर्शनी का आयोजन होता है।''

उन्होंने कहा, ''इस तरह के आयोजन डिजाइनर्स को एकीकृत नहीं करते बल्कि उद्योग का स्थानीयकरण करते हैं। आज जयपुर फैशन सप्ताह, कोलकाता फैशन सप्ताह, बेंगलुरू फैशन सप्ताह जैसे कई आयोजन होने लगे हैं।''

वर्मा पिछले दो दशक से भी लंबे समय से फैशन उद्योग में हैं। वह महसूस करते हैं कि फैशन सप्ताह के अधिक आयोजनों से व्यापार भी प्रभावित होता है।

उन्होंने बताया, ''आप इस पर विश्वास नहीं करेंगे कि जब देश में फैशन सप्ताह शुरू हुए थे तो पूरे देश से खरीददार आते थे और कभी-कभी तो ऐसी जगहों से खरीददार आते थे जिनके बारे में हमने सुना भी नहीं था।''

वह कहते हैं, ''अब चीजें बदल गई हैं। अब हैदराबाद से एक खरीददार फैशन सप्ताह के लिए राजधानी नहीं आता क्योंकि खुद उसके शहर में भी यह आयोजन होता है। इस तरह से ये फैशन सप्ताह फायदा पहुंचाने की जगह नुकसान कर रहे हैं।''

वह महसूस करते हैं कि अब 'फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया' (एफडीसीआई) को विकास करते इस फैशन उद्योग में कुछ बदलाव करने चाहिए।

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