DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सजी हैं चुनाव प्रचार सामग्री की दुकानें, खरीदारों का टोटा

बिहार विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ता और नेता जहां टिकटों के जुगाड़ के लिए जी तोड़ मेहनत किये हुए हैं वहीं चुनाव प्रचार सामग्री से सजी धजी दुकानों में खरीदारों का टोटा पड़ रहा है।

जिन्हें टिकट मिल गया है वे खुश हैं लेकिन इससे वंचित और टकटकी लगाये रहने वाले तैयारियों की बजाय सारी ऊर्जा विरोध प्रदर्शन पर खर्च कर रहे हैं। इसका बड़ा असर इस सामग्री की बिक्री पर पड़ रहा है। पट्टे, झंडे, टोपी, पोस्टर, बैनर, हेडबैंड और नोटपैड से दुकानें सजी हैं लेकिन टिकट मिलने में असमंजस की स्थिति के कारण बाजार में रौनक नहीं है।

बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर जदयू और भाजपा मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। राजग में जदयू ने अपने कोटे की 138 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। वहीं भाजपा ने 92 सीटों पर उम्मीदवारों की स्थिति साफ की है। चुनाव प्रचार सामग्री के व्यवसायियों को अभी तक निराशा ही हाथ लगी है जबकि कुछ को उम्मीद है कि पहले चरण के लिए पांच अक्टूबर को प्रत्याशियों की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाने के बाद व्यवसाय में तेजी आयेगी।

पांच अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। पटना में चुनाव प्रचार सामग्री के एक बडे विक्रेता सत्येंद्र नारायण सिंह ने कहा कि इस बार के चुनाव में आयोग के आचार संहिता के डंडे ने पार्टियों और कार्यकर्ताओं को भयभीत कर रखा है। चुनाव प्रचार के लिए सामग्री जैसे झंडे, बैनर आदि का उपयोग कार्यकर्ता और प्रत्याशी का लोकतांत्रिक अधिकार है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सजी हैं चुनाव प्रचार सामग्री की दुकानें, खरीदारों का टोटा