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राष्ट्रमंडल खेल: मलेशिया के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी

राष्ट्रमंडल खेल: मलेशिया के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी

भारत की पुरुष हॉकी टीम 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी चुनौती का आगाज़ मंगलवार को मलेशिया के साथ खेलते हुए करेगी। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में होने वाले ग्रुप-ए के इस मुकाबले के लिए भारत को संभावित विजेता माना जा रहा है।

दोनों टीमों के बीच अंतिम भिड़ंत इस वर्ष सुल्तान अज़लान शाह हॉकी टूर्नामेंट के दौरान हुई थी। अपने देश में आयोजित इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए मलेशिया ने फाइनल में जगह बनाई थी। उसके बाद मलेशिया को बहुत अधिक अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले खेलने का मौका नहीं मिला लेकिन इस दौरान भारत ने एक महीने का यूरोप दौरा करके अपनी जड़ों को मज़बूत किया।

उससे ठीक पहले भारत ने एफआईएच विश्वकप में हिस्सा लिया था लेकिन उसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। उसे आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा था। यूरोप दौरे से लौटने के बाद भारतीय टीम ने पुणे में आयोजित कैम्प में लगभग एक महीना बिताया। यह कैम्प टीम के लिए खासा फायदेमंद रहा क्योंकि इस दौरान मुख्य कोच जोस ब्रासा ने प्रदर्शन और फिटनेस सुधारने को लेकर कई तरह के प्रयोग किए।

कैम्प में फिटनेस पर सर्वाधिक ध्यान दिया गया। इस दौरान खिलाड़ियों में एका बनाए रखने का भी प्रयास किया गया। खिलाड़ियों ने स्वीकार किया है कि पुणे कैम्प उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास के लिए काफी फायदेमंद रहा है क्योंकि वहां फिटनेस और खेल के अलावा योग के माध्यम से मानसिक शांति का भी अभ्यास कराया गया।

भारतीय खिलाड़ी लगभग 12 दिन पहले खेल गांव पहुंचे हैं। यह टीम को हर समय साथ-साथ देखा जा रहा है। कोच हरेंद्र सिंह और ब्रासा ने टीम में एकता का संचार किया है। इसका फायदा टीम को राष्ट्रमंडल खेलों में ज़रूर मिलेगा। महिला टीम के उलट पुरुष टीम ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी क्षमता के साथ न्याय नहीं किया है। 1998 में हॉकी को पहली बार राष्ट्रमंडल खेलो में जगह मिली, उसके बाद से भारतीय टीम तीसरी बार इन खेलों में हिस्सा ले रही है।

वर्ष 1998 में कुआलालम्पुर में उसे चौथा स्थान मिला था जबकि उसने 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रंडल खेलो में हिस्सा नहीं लिया था। 2006 में मेलबर्न मे आयोजित पिछले संस्करण में भारतीय टीम निराशाजनक तौर पर छठे स्थान पर रही थी।

भारतीय खिलाड़ी इस वर्ष दूसरी बार घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहे हैं। पहली बार विश्वकप में खेलते हुए उन्होंने निराश किया था। विश्वकप के दौरान भारत के सभी मैचों में रिकॉर्ड संख्या में दर्शक जुटे थे। पाकिस्तान के साथ उसके मुकाबले के माध्यम से तो एक रिकॉर्ड कायम हुआ था।

राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी हॉकी के सभी टिकट बिक चुके हैं। भारत-पाक मैच का टिकट पहले बिका था। ऐसे में भारतीय टीम के सामने पिछली नाकामी को भुलाते हुए जीत के साथ आगाज़ करना होगा क्योंकि घरेलू दर्शकों को इससे कम कुछ और मंजूर नहीं।

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