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भूखे पेट भी चेहरे पर मुस्कान बिखेरते वॉलंटियर्स

उन्हें भले दिनभर में एक बार खाने को मिल रहा हो लेकिन फिर भी वे अपने चेहरे पर मुस्कान लिए हर एक मेहमान की सेवा में लगे हुए हैं। खेल गांव में अपनी सेवाभाव से सभी का दिल जीतने वाले वॉलंटियर्स इस समय अपने सीनियर अधिकारियों से काफी नाराज चल रहे हैं। नाराज होने की वजह यह है कि इन्हें न तो ठीक तरह से कुछ खाने को मिल रहा है और न ही मेट्रो में आने-जाने के लिए कूपन ही उपलब्ध हो पा रहा है।

एक वॉलंटियर्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमें सुबह नौ बजे यहां पर आना होता है और शाम के छह बजे तक काम करना होता है। इस बीच हमें सिर्फ एक बार ही खाने का कूपन मिलता है, जिससे या तो हम नाश्ता करे या लंच। लंच में भी कभी केवल रोटी मिलती है तो कभी केवल चावल से काम चलाना पड़ता है। उसने बताया कि हमें दिनभर खड़े रहना पड़ता है इसलिए हमारे पैर भी सूज जाते हैं, लेकिन यहां पर दवा की कोई अच्छी व्यवस्था ही नहीं है।

एक और वॉलंटियर्स ने बताया कि जो यहां पर पेड स्टाफ हैं उन्हें पूरी सुविधाएं मिल रही है जबकि हम सबसे ज्यादा मेहनत कर रही है तो हमें कुछ भी नहीं मिलता। पिछले दो दिनों से हम अपने किराए से मैट्रो में सफर कर रहे हैं जब हम मेट्रो कूपन मांगने जाते हैं तो कहा जाता है कि कूपन खत्म हो गया है। यह पूछने पर कि जब खेल खत्म हो जाएंगे तो आपको क्या मिलेगा, तो उन्होंने बताया कि हमें केवल एक सर्टिफिकेट ही दिया जाएगा, उसके अलावा हमें कुछ भी नहीं मिलेगा।

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